जश्न या जानलेवा लापरवाही? तिलक समारोह में हर्ष फायरिंग से मचा कोहराम, पूर्व मुखिया गिरफ्तार

Manju
By Manju
3 Min Read

डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: खुशियां कब मातम और दहशत में बदल जाएं, इसका ताजा उदाहरण हरिहरगंज थाना क्षेत्र के भगत तेंदुआ गांव में देखने को मिला। शुक्रवार की रात राहुल बैठा के घर आयोजित तिलक समारोह उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब ‘हर्ष फायरिंग’ के दौरान एक गोली ने दो लोगों को लहूलुहान कर दिया। ​इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पूर्व मुखिया सरोज प्रसाद कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे घटी घटना?
​रात करीब 10:30 बजे तिलक की रस्में चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसी दौरान पिपरघाट निवासी पूर्व मुखिया सरोज कुशवाहा ने अपनी लाइसेंसी राइफल से फायरिंग शुरू कर दी। अचानक राइफल पर से नियंत्रण खो गया और चली हुई गोली भीड़ में जा घुसी। पंडित अरविंद कुमार मिश्रा (60 वर्ष) तिलक करा रहे पुजारी के जांघ में गोली आर-पार हो गई। जगेश्वर बैठा की पीठ को चीरते हुए गोली निकल गई। गोली चलते ही समारोह में अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए औरंगाबाद और फिर गया रेफर कर दिया गया है।

पुलिसिया कार्रवाई और आरोपी का दांव
​घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी देवव्रत पोद्दार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आरोपी पूर्व मुखिया को हिरासत में ले लिया है। पुलिस की जांच में कुछ अहम बिंदु सामने आए हैं।

हथियार बरामद: पुलिस ने मौके से आरोपी की लाइसेंसी राइफल और पिस्टल जब्त कर ली है। साथ ही एक खोखा और जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं।

आरोपी की दलील: पूर्व मुखिया ने दावा किया कि गोली ‘गलती से पिस्टल’ से चली थी, लेकिन पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ है कि फायरिंग राइफल से हुई थी।

लाइसेंस होगा रद्द: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के हथियारों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बड़ा सवाल: कानून से बेखौफ क्यों हैं ‘माननीय’?
​प्रशासन द्वारा हर्ष फायरिंग पर कड़े प्रतिबंध के बावजूद रसूखदार लोग कानून की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। थाना प्रभारी का संदेश है कि जश्न के नाम पर किसी की जान को खतरे में डालना अक्षम्य अपराध है। इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।

Share This Article