टाटा स्टील वेज रिवीजन: 7.5% MG पर अड़ा मैनेजमेंट, 13% की मांग के साथ यूनियन ने भी खींची तलवारें, जानें कहां फंसा है पेंच

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित वेज रिवीजन समझौते को लेकर चल रहा सस्पेंस और गहरा गया है। मैनेजमेंट और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच दो अलग-अलग दौर की मैराथन वार्ता हुई, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। मिनिमम गारंटी बोनस और समझौते की अवधि को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, जिसके कारण गतिरोध बरकरार है।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?
​इस बार का वेज रिवीजन पूरी तरह से मैनेजमेंट के प्रस्ताव और यूनियन की मांगों के बीच टकराव में बदल चुका है।

मैनेजमेंट का प्रस्ताव (7.5% MG और 8 साल की अवधि): कंपनी प्रबंधन का कहना है कि वे 7.5% MG और 8 वर्ष के समझौते पर ही आगे बढ़ेंगे। मैनेजमेंट का दावा है कि इस प्रस्ताव से भी कर्मचारियों के बेसिक वेतन में करीब ₹9,750 की बढ़ोतरी होगी, जो पिछले वेज रिवीजन की तुलना में अधिक लाभदायक है। प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि वह 7.5% से अधिक बढ़ोतरी करने की स्थिति में नहीं है।

यूनियन की मांग (13% MG और 7 साल की अवधि): दूसरी ओर कर्मचारियों की नुमाइंदगी कर रही यूनियन ने अपने रुख में थोड़ी नरमी जरूर दिखाई है (पहले मांग 15% थी, जिसे घटाकर अब 13% किया गया है), लेकिन वे इससे नीचे जाने को तैयार नहीं हैं। यूनियन का साफ कहना है कि समझौता सिर्फ 7 साल की अवधि के लिए ही होना चाहिए।

पिछले समझौतों का हवाला देकर मैनेजमेंट ने खड़े किए हाथ
​बैठक के दौरान जब यूनियन ने एमजी बढ़ाने पर दबाव डाला, तो प्रबंधन ने पिछले सालों के वेज रिवीजन के आंकड़े टेबल पर रख दिए। मैनेजमेंट ने तर्क दिया कि भले ही इस बार प्रतिशत कम दिख रहा हो, लेकिन कर्मचारियों को मिलने वाली वास्तविक राशि पिछले सालों से अधिक होगी। प्रबंधन ने पिछले समझौतों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2007 में 21% MG मिलने पर ₹3,147 प्रतिमाह की वृद्धि हुई थी। वहीं वर्ष 2012 में 18.25% MG पर ₹6,436 और वर्ष 2018 में 12.75% MG मिलने पर ₹8,657 प्रतिमाह की बढ़ोतरी हुई थी।

मैनेजमेंट का तर्क: कंपनी का कहना है कि इस बार 7.5% MG का प्रस्ताव होने के बावजूद कर्मचारियों को सीधे तौर पर करीब ₹9,750 प्रतिमाह का फायदा हो रहा है, जो पिछले सभी संशोधनों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इसलिए इस प्रतिशत में और बढ़ोतरी करना संभव नहीं है।

आगे क्या? कर्मचारियों की बढ़ी धड़कनें
​वार्ता के दोनों दौर बेनतीजा खत्म होने से अब गेंद फिर से बीच में अटक गई है। जहां एक तरफ प्रबंधन वित्तीय और पुरानी गणनाओं का हवाला देकर अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है, वहीं यूनियन पर भी कर्मचारियों के हितों की रक्षा और एक सम्मानजनक समझौते का भारी दबाव है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में क्या कोई मध्यस्थता का रास्ता निकलता है या फिर यह गतिरोध टाटा स्टील के औद्योगिक माहौल में कोई नया मोड़ लेकर आता है।

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