चांडिल में जंगली हाथी का तांडव, वन विभाग की सुस्ती पर भड़के ग्रामीण

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के चांडिल प्रखंड में जंगली हाथियों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि ग्रामीणों की रातें अब जागते हुए कट रही हैं। भोजन की तलाश में जंगलों से निकलकर बस्तियों का रुख कर रहे हाथियों ने पूरे इलाके में आतंक मचा रखा है। सोमवार की देर रात एक अकेले जंगली हाथी ने लावा बहेराडीह और काशीपुर गांवों में जमकर उत्पात मचाया, जिससे ग्रामीण दहशत में आ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद वन विभाग की टीम कान में तेल डालकर सोई हुई है। सूचना देने के बाद भी कोई अधिकारी या रेस्क्यू टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।

एक रात, 5 घर जमींदोज: किसी तरह बचाई जान
​सोमवार रात को आए एक अकेले हाथी ने सबसे पहले लावा बहेराडीह गांव में धावा बोला। यहां उसने तरनी महतो, पूर्णचंद महतो और राजीव महतो के घरों को अपना निशाना बनाया। हाथी ने इन घरों की दीवारें और छत बुरी तरह तोड़ डाले।
​तरनी महतो के घर में रखा सारा धान और अन्य खाद्य सामग्रियां हाथी चट कर गया। ​इसके बाद हाथी काशीपुर गांव पहुंचा, जहां उसने दो और घरों को भारी नुकसान पहुंचाया। गनीमत रही कि घरों में सो रहे लोग वक्त रहते जाग गए और भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

मशाल और शोर के भरोसे ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग से कोई मदद न मिलने पर वे खुद ही जान जोखिम में डाल रहे हैं। रात होते ही लोग मशालें जलाकर और शोर मचाकर हाथी को जंगल की तरफ खदेड़ने को मजबूर हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण ग्रामीण पूरी रात जागकर पहरा दे रहे हैं।

सप्ताह भर में एक दर्जन से ज्यादा घर तबाह, दाने-दाने को तरसे परिवार
​यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले महज एक सप्ताह के भीतर चांडिल प्रखंड के अलग-अलग गांवों में हाथियों ने एक दर्जन से अधिक घरों को ध्वस्त कर दिया है। घरों के टूटने और अनाज के बर्बाद हो जाने के कारण कई गरीब परिवारों के सामने अब रहने की छत और दो वक्त की रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

प्रशासन से मुआवजे की गुहार
​हाथियों के इस बढ़ते तांडव और सिस्टम की बेरुखी से तंग आकर पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत की मांग की है। प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि बेघर और प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।
​हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए।

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