बिहार में सरकारी खर्चे पर अब विदेश यात्रा नहीं हो सकेगी। मंत्री और अफसर सरकारी खर्चे पर दूसरे देशों की यात्रा नहीं कर पाएंगे। हां, इसके बदले सरकार अपने अफसर-कर्मियों को सपरिवार बिहार के पर्यटन स्थल के प्रवास पर जरूर भेजेगी।
विदेश ने ‘बिहार दर्शन’ करेंगे बिहार के मंत्री-अफसर
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर प्रशासनिक फिजूलखर्ची रोकने और राज्य के पर्यटन को विश्व पटल पर लाने के लिए एक अनूठी नीति लेकर आई है। इसके तहत सरकारी खर्च पर मंत्रियों और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर फिलहाल रोक लगाई दी गई। इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संकट और गैर-जरूरी विदेशी दौरों से बचने की अपील से जोड़कर देखा जा रहा है। अब अफसरों और कर्मचारियों को अपने गृह जिले से बाहर निकलकर सपरिवार ‘बिहार दर्शन’ करना होगा, ताकि वे स्थानीय पर्यटन स्थलों की व्यवस्थाओं को समझकर उनमें सुधार के सुझाव दे सकें।
राज्य के अलग-अलग पर्यटन स्थलों में करेंगे प्रवास
बिहार सरकार के आदेश के अनुसार, बिहार के सरकारी अधिकारी, कर्मी हर तीन महीने में एक बार 2 दिन के लिए अपने परिवार को घुमाने ले जाएंगे और अलग-अलग जिलों के पर्यटन क्षेत्रों में प्रवास करेंगे। इसके लिए सरकार की ओर से अधिकारियों को टीए और डीए भी दिया जाएगा। इस दो दिवसीय प्रवास की अवधि को ‘ऑन ड्यूटी’ (कर्तव्य पर बिताई गई अवधि) माना जाएगा।
3 पर्यटन स्थलों का भ्रमण जरूरी
बिहार सरकार के ‘बिहार दर्शन’ योजना के तहत अफसर-कर्मी गृह जिला छोड़कर दूसरे जिलों में सपरिवार भ्रमण करेंगे। शुक्रवार और शनिवार को पर्यटन स्थल पर रुकना होगा। यात्रा के बाद फोटो, अनुभव और सुझाव का प्रतिवेदन विभाग को सौंपना अनिवार्य रहेगा। होम स्टे और ईको टूरिज्म को प्राथमिकता देनी होगी। प्रतिवेदन जुटाने के लिए नोडल अफसर तैनात किए जाएंगे। पर्यटन सुविधाओं की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।
प्रवास के दौरान समीक्षा बैठक और स्थल निरीक्षण पर रोक
इसके साथ ही सरकार ने एक बेहद कड़ा नियम लागू किया है कि इस भ्रमण के दौरान कोई भी अधिकारी (चाहे वह जिला पदाधिकारी हो, पुलिस अधीक्षक हो या वन प्रमंडल अधिकारी) अपने सरकारी कार्यों के उद्देश्य से न तो कोई समीक्षा बैठक करेगा और न ही किसी प्रशासनिक स्थल का निरीक्षण करेगा। दरअसल, इसका सीधा उद्देश्य यह है कि अधिकारी पूरी तरह से एक आम पर्यटक की तरह समय बिताएं और पर्यटन व्यवस्था को समझे।
पीएम मोदी की अपील का असर
अमेरिका-ईरान-इजराइल युद्ध को ले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए पेट्रोल बचत से लेकर विदेश यात्रा तक से परहेज करने के आह्वान से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री के इस आह्वान का बिहार में फौरी असर हुआ। प्रधानमंत्री ने अपना कारकेड छोटा किया, तो तत्काल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी यही किया। अपने कारकेड को सिर्फ 3 गाड़ियों तक सीमित किया। एक गाड़ी खुद के लिए, तो आगे-पीछे की 2 गाड़ियों में उनके सुरक्षाकर्मी तथा अन्य लोग। राज्यपाल ने भी ठीक यही किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री-अफसरों के आगे-पीछे घूमने वाली गाड़ियां भी कम हुईं। मुख्यमंत्री ने ‘’नो व्हीकल डे’’ मनाने की बात कही। अफसरों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से मीटिंग करने को कहा। ‘’वर्क फ्रॉम होम’’ पर जोर दिया। विदेश यात्रा पर पाबंदी की बात, इसी कड़ी का खास हिस्सा है।

