डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत कोवाली थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक मामला सामने आया है। हेंसडा निवासी श्यामा प्रसाद बेरा के परिजनों ने कोवाली थाना प्रभारी मुकेश कुमार साव पर हिरासत में बेरहमी से मारपीट करने और छोड़ने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने का संगीन आरोप लगाया है। इस घटना को लेकर पीड़ित के पुत्र कर्ण बेरा ने वरीय पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं विधायक संजीव सरदार से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है।
रात के अंधेरे में उठाया, अस्पताल से भी जबरन डिस्चार्ज कराया
एसएसपी को सौंपे गए शिकायत पत्र में कर्ण बेरा ने आरोप लगाया है कि कोवाली पुलिस महज संदेह के आधार पर उनके बुजुर्ग पिता श्यामा प्रसाद बेरा को घर से उठाकर थाने ले गई थी। आरोप है कि थाने के भीतर उनके साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनकी तबीयत बेहद बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर पुलिस ने उन्हें आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका में भर्ती कराया। कर्ण के अनुसार जब मुझे जानकारी मिली और मैं अस्पताल पहुंचा, तो पिता की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी। उनका शुगर लेवल 400 के पार जा चुका था। इसके बावजूद पुलिस ने संवेदनहीनता दिखाते हुए उन्हें जबरन अस्पताल से डिस्चार्ज कराया और दोबारा थाने ले आई।
₹1 लाख की रिश्वत और बिना सबूत प्रताड़ना का आरोप
पीड़ित परिवार का दावा है कि श्यामा प्रसाद बेरा के खिलाफ किसी भी तरह के अपराध की पुष्टि नहीं हुई है और न ही उनके पास से कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया है। इसके बावजूद उन्हें प्रताड़ित किया गया और मामले को रफा-दफा करने के एवज में एक लाख रुपये की घूस मांगी गई।
थाना प्रभारी ने आरोपों को नकारा: ‘सभी दावे बेबुनियाद’
दूसरी ओर इन गंभीर आरोपों पर कोवाली थाना प्रभारी मुकेश कुमार साव ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने पुलिस पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। थाना प्रभारी का कहना है कि पीड़ित के साथ थाने में किसी भी तरह की मारपीट नहीं की गई है। पैसे मांगने या प्रताड़ित करने का दावा पूरी तरह झूठ और बेबुनियाद है। पुलिस केवल नियमानुसार अपनी जांच कर रही थी।
जांच के बाद ही साफ होगी हकीकत
एक तरफ जहां पीड़ित परिवार पुलिसिया जुल्म और घूसखोरी के खिलाफ आला अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग इसे खुद को फंसाने की साजिश बता रहा है।

