बिहार विधान परिषद की 10 सीटों (एक सीट पर उपचुनाव) पर होने वाले एमएलसी चुनाव के नॉमिनेशन का आज आखिरी दिन है। सभी पार्टी पार्टियों के उम्मीदवार आज विधानसभा परिसर में रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पर्चा भरेंगे। बिहार विधानपरिषद के लिए एनडीए के 9 (नीतीश की सीट पर उपचुनाव समेत) और राजद के एक उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे।
एनडीए से किसे मिला टिकट?
NDA की ओर से बीजेपी और जदयू ने 4-4 उम्मीदवार उतारें है। एक सीट पर चिराग पासवान की पार्टी ने कैंडिडेट उतारा है। सबसे ज्यादा चर्चा भोजपुरी सिंगर पवन सिंह की है। वहीं, जदयू की ओर से निशांत कुमार भी नॉमिनेशन करेंगे। भाजपा ने भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह (राजपूत), संजय मयूख (कायस्थ), शीला पंडित (कुम्हार) और अनिल ठाकुर (नाई, ठाकुर) शामिल हैं। जदयू ने विधान परिषद चुनाव और उपचुनाव के लिए निशांत कुमार (कुर्मी), भारती मेहता (नोनिया), शिवरानी देवी प्रजापति (कुम्हार) और ललन प्रसाद (धानुक) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। लोजपा रामविलास ने अशरफ अंसारी (मुस्लिम) को टिकट दिया।
दीपक प्रकाश के लिए मुश्किल भरा समय
दीपक प्रकाश, बिहार के पंचायती राज मंत्री को अपना पद गंवाना पड़ सकता है। मंत्री दीपक प्रकाश ने नाम की घोषणा अब तक नहीं हुई है। उन्हें एनडीए की ओर से उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। रतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड ने विधान परिषद चुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। लेकिन इस लिस्ट में दीपक प्रकाश का नाम नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं। ऐसे में एमएलसी चुनाव में उनका नाम नहीं आने को उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजद ने किसे बनाया एमएलसी उम्मीदवार
बिहार विधान परिषद् की एक सीट के लिए राष्ट्रीय जनता दल ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। राजद फिर से सुनील कुमार सिंह को भरोसा जताया है। वह वर्तमान में विधान परिषद् के सदस्य हैं। लालू परिवार के काफी करीबी हैं। राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई हैं। लालू प्रसाद ने उनके ही नाम पर अंतिम मुहर लगाई है।
18 जून को होगी वोटिंग
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक रहती है तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा। फिलहाल बिहार की राजनीति की निगाहें आज के नामांकन और आरजेडी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
क्या है जीत का फॉर्मूला?
आंकड़ों के अनुसार एनडीए की 9 में से 8 सीटों पर जीत पक्की मानी जा रही है, जबकि एक सीट आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के खाते में जाएगी। विधानसभा में एनडीए के अभी 202 विधायक हैं। 9 सीटों पर एक साथ चुनाव हो रहे हैं तो गणित के हिसाब से एक एमएलसी प्रत्याशी को जीत के लिए कम से कम 25 विधायकों का वोट जरूरी है। इस तरह बीजेपी (89-3), जेडीयू (85-4), लोजपा-आर (19-1), RLM (4-1) और हम मिलकर 8 एमएलसी की जीत को आसान बना देंगे।

