बिहार की राजधानी पटना में NEET पेपर लीक के विरोध में बुधवार को निकला छात्र प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया। सुबह गांधी मैदान से शुरू हुआ प्रदर्शन शाम तक राजधानी के कई इलाकों में फैल गया। सड़कों पर उतरे उपद्रवियों ने भारी पथराव किया और पुलिस व पत्रकारों को निशाना बनाया। इस दौरान पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रदर्शन के बाद देर रात एक्शन में आई पटना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तक 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।
कैसे जुटे 10 हजार प्रदर्शनकारी?
वाम दल के छात्र संगठन आइसा के बैनर तले इस प्रदर्शन की शुरुआत जब गांधी मैदान के गेट नंबर दस से हुई तो लगभग 200 लड़के थे। जेपी गोलंबर तक यह संख्या पांच सौ हो गई। पटना पुलिस की टीम ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया लेकिन यह लोग नहीं माने। प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। कई पत्रकारों के साथ मारपीट की। कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हुई। दो घंटे में हालात सामान्य हो गए। करीब एक घंटे के अंदर प्रदर्शनकारी पुलिस को चक्मा देते हुए डाकबंगला चौराहा पर जुट गए। यहां पर 10 हजार प्रदर्शनकारी जमा हुए। यहां पर आइसा के अलावा अन्य छात्र संगठन के कार्यकर्ता भी जमा हुए।
प्रदर्शनकारी छात्र बैरिकेडिंग ही उठा कर भागे
पटना में छात्रों की रणनीति और अचानक बढ़ते हुजूम के आगे पुलिस प्रशासन बेबस नजर आया। दरअसल, पुलिस जैसे ही प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगा रही थी। उसे लोग उठाकर अपने साथ ले जा रहे थे। बैरिकेडिंग हटने के बाद प्रदर्शन में शामिल लोग एक साथ आगे की ओर बढ़ रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल को लगभग छह घंटे तक छकाया।
पटना आईजी की गाड़ी को बनाया निशाना
उपद्रवियों ने डाकबंगला चौराहे से लेकर बेली रोड तक जमकर रोड़ेबाजी की। उन्होंने पटना आईजी की एस्कॉर्ट गाड़ी, सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की गाड़ी और कई पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की। हमले के दौरान भागलपुर के भाजपा विधायक रोहित पांडे की गाड़ी को पलटने की कोशिश हुई और उनके साथ मारपीट भी की गई। इसके अलावा, भाजपा विधायक विनय बिहारी और पार्टी नेता अजय सिंह की गाड़ियों के शीशे भी फोड़ दिए गए।
इतने बड़े प्रदर्शन के पीछे किन लोगों का हाथ?
एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि CCTV फुटेज, वीडियो ग्राफी और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए उपद्रवियों की पहचान की जा रही है, जिसके बाद सभी की गिरफ्तारी होगी। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि इस बड़े प्रदर्शन के पीछे किन लोगों का हाथ था और इसकी प्लानिंग कैसे बनाई गई थी। मामले में किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके अलावा, साइबर सेल के जरिए कुछ यू-ट्यूबरों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका की भी जाँच की जा रही है।

