पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष विराम की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसका असर अब भारत के खाद्य तेल बाजार पर भी दिखने लगा है और आने वाले दिनों में सरसों, सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल के दाम कम हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान कच्चे तेल और शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई थी, जिससे खाद्य तेलों की कीमतें भी प्रभावित हुईं। अब हालात सामान्य होने और समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव कम होने से आयात लागत घटने की संभावना है।
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में नरमी का सीधा फायदा घरेलू बाजार को मिल सकता है। खासकर त्योहारों के मौसम से पहले खाद्य तेल सस्ता होने की उम्मीद से आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बाजार में तत्काल बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी, क्योंकि कई कंपनियों के पास अभी भी ऊंची कीमतों पर खरीदा गया पुराना स्टॉक मौजूद है। ऐसे में खुदरा बाजार में कीमतों में कमी धीरे-धीरे देखने को मिल सकती है।
यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में खाद्य तेल के साथ-साथ अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

