1 करोड़ का नक्सली, 3000 सुरक्षा बल और 40 KM का सफर: कैसे चकमा दे गया मोस्ट वांटेड मिसिर बेसरा?

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड, बिहार और ओडिशा बेल्ट का मोस्ट वांटेड माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में कामयाब रहा है। करीब 3000 सुरक्षा बलों की कड़ी घेराबंदी को तोड़ते हुए एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा सारंडा के जंगलों से निकलकर 40 किलोमीटर दूर कोल्हान के जंगलों में पहुंच गया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसे एक बड़ी रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है।

चौतरफा घेराबंदी के बावजूद कैसे भागा मिसिर बेसरा?
​सुरक्षा बलों ने सारंडा के जराइकेला, गोइलकेरा और किरीबुरु क्षेत्र में नक्सलियों को पूरी तरह घेर लिया था। बालिबा के आगे का इलाका बेहद घना और पहाड़ी होने के कारण वहां पुलिस का लगातार डटे रहना मुश्किल था। नक्सलियों ने इसी भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा बलों की रणनीतिक चूक का फायदा उठाया। मिसिर बेसरा अपने सहयोगी अजय महतो के साथ रात के वक्त बहुत ही छोटे समूह में वहां से निकला। चूंकि सुरक्षा बल रात में लैंड माइंस के खतरे के कारण आगे बढ़ने से परहेज करते हैं, इसी का लाभ उठाकर बेसरा 40 किलोमीटर का सफर तय कर कोल्हान के जंगलों में सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गया।

ठिकाना बदलने की बड़ी वजहें
​सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा बलों के कड़े दबाव के कारण नक्सलियों को लगातार अपनी लोकेशन बदलनी पड़ रही है।

लॉजिस्टिक्स सप्लाई टूटना: सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से नक्सलियों की रसद, दवाइयां और खाने-पीने के सामान की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो चुकी है।

बड़े कैंपों का ध्वस्त होना: पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कई बड़े कैंप तबाह कर दिए हैं।

लगातार सिमटता दायरा: ऑपरेशन का दायरा सारंडा से आगे बढ़ाए जाने के कारण नक्सली अब खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं।

तीन हिस्सों में बंटा नक्सलियों का नेटवर्क
​सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण नक्सलियों का नेटवर्क अब तीन अलग-अलग हिस्सों में बंट चुका है।
कोर ग्रुप: इसमें मिसिर बेसरा और अजय महतो जैसे हार्डकोर नक्सली शामिल हैं, जो अब सारंडा छोड़कर कोल्हान के जंगलों में सक्रिय हैं। दबाव बढ़ने पर ये दलमा क्षेत्र को शरणस्थली बनाने की फिराक में हैं।
दूसरा ग्रुप: इस ग्रुप में 10 से 15 नक्सली शामिल हैं, जो सारंडा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में छोटे-छोटे समूहों में बंटकर रह रहे हैं।
तीसरा ग्रुप: इस ग्रुप के नक्सली फिलहाल पोड़ाहट के जंगलों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

ओडिशा सीमा से दलमा तक सर्च ऑपरेशन तेज
​इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं। वर्तमान में झारखंड और ओडिशा की पुलिस केंद्रीय बलों के साथ मिलकर एक संयुक्त बड़ा अभियान चला रही है। ड्रोन निगरानी और ग्राउंड इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों के पास अब सरेंडर करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है और बहुत जल्द पूरे इलाके को नक्सल मुक्त करा लिया जाएगा।

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