बिहार केभोजपुर में हुए भरत तिवारी कथित एनकाउंटर के बाद से एसपी राज विवादों में हैं।मृतक के परिजनों ने एसपी राज पर रात के अंधेरे में उनके घर आकर केस दबाने, मीडिया से दूरी बनाने और बात न मानने पर दूसरे बेटे को मारने की धमकी देने का संगीन आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
भाई को भरत जैसा अंजाम करने की धमकी
पुलिस अधीक्षक पर मृतक के भाई चंदन तिवारी को डराने-धमकाने का आरोप लगाया गया था। भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी और मां आशा देवी ने आरोप लगाया कि भोजपुर एसपी मिस्टर राज ने रात के अंधेरे में उनके घर पहुंचे थे। परिजनों का दावा है कि एसपी ने उन्हें अकेले में ले जाकर मीडिया से दूरी बनाने, जांच बंद करने और मामले को दबाने का दबाव बनाया। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि बात न मानने पर दूसरे बेटे का भी भरत जैसा अंजाम करने की धमकी दी गई।
पुलिस ने आरोपों को निराधार बताया
वहीं, पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोपों को निराधार बताया है। पुलिस ने कहा है कि ऐसे सभी आरोप पूरी तरह असत्य, निराधार और तथ्यहीन हैं। पुलिस का कहना है कि एसपी केवल पीड़ित परिवार से संवेदना व्यक्त करने और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाने के लिए उनके घर गए थे।
लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील
पुलिस ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि भरत तिवारी मामले को लेकर सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों पर पुलिस अधीक्षक के खिलाफ जो बातें कही जा रही हैं, उनका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। बता दें कि सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि भोजपुर एसपी ने मृतक के भाई चंदन तिवारी को डराने और धमकाने की कोशिश की है।
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?
भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी का कथित एनकाउंटर किया। भरत तिवारी का एनकाउंटर 17 जून 2026 को हुआ था। भोजपुर पुलिस ने दावा किया कि भरत ने उन पर गोलियां चलाई थीं। हालांकि, वीडियो में भरत तिवारी को आत्मसमर्पण करते हुए साफ देखा गया। भरत के परिजनों ने इसे साजिश के तहत की गई हत्या करार दिया। विपक्ष और नेताओं ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताकर हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब न्यायिक जांच जारी है।

