डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। झींकपानी स्थित लगभग 80 साल पुराना ऐतिहासिक अदाणी एसीसी सीमेंट वर्क्स आगामी 16 अगस्त 2026 से हमेशा के लिए बंद होने जा रहा है। कंपनी के इस औचक फैसले ने स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसका दी है। बुधवार को इस फैसले के खिलाफ हज़ारों मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। अपनी आजीविका को बचाने की जंग में स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों ने 15 किलोमीटर का लंबा पैदल मार्च निकाला और जिला मुख्यालय पहुंचकर उपायुक्त मनीष कुमार के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपा।
दांव पर लगी हैं हज़ारों जिंदगियां: ये वर्ग होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित
मजदूर नेता रमेश बालमुचू ने इस सीमेंट संयंत्र की बंदी को पूरे क्षेत्र के लिए एक आर्थिक आपदा करार दिया है। वर्ष 1946 में स्थापित यह प्लांट पश्चिमी सिंहभूम की एकमात्र ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई है। प्लांट बंद होने से कई स्तरों पर गंभीर संकट पैदा होने वाला है।
मजदूरों पर सीधा वार: इस फैसले से 74 स्थायी कर्मचारियों और करीब 1,500 अस्थायी मजदूरों के सामने सीधे तौर पर बेरोज़गारी और भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा।
कारोबार पर ब्रेक: क्लिंकर और सीमेंट धुलाई बंद होने से परिवहन (ट्रांसपोर्ट) व्यवसाय से जुड़े लोगों और स्थानीय छोटे व्यापारियों का धंधा पूरी तरह ठप हो जाएगा।
आदिवासी समुदाय पर दोहरी मार: क्षेत्र में लंबे समय से हुए खनन के कारण खेती पहले ही प्रभावित हो चुकी है। अब रोज़गार का इकलौता साधन छिनने से झींकपानी और टोंटो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति बनेगी।
मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन चूना पत्थर की कमी और क्लिंकर उत्पादन की बढ़ती लागत का बहाना बना रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ज़मीन भी गई, रोज़गार भी जाएगा -आदिवासियों का दर्द
यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पश्चिमी सिंहभूम संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आने वाला एक संवेदनशील आदिवासी बहुल क्षेत्र है। मजदूरों का कहना है कि यह प्लांट और इसकी चूना पत्थर खदानें आदिवासियों की जमीनों पर ही बनी थी। 80 सालों तक चले खनन के कारण क्षेत्र का भू-जल स्तर गिर चुका है और कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है। ऐसे में अगर रोज़गार का यह इकलौता साधन भी छिन गया, तो स्थानीय युवाओं के पास पलायन और आर्थिक ठहराव के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। मजदूरों ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े संकट पर राज्य और केंद्र सरकार अब तक चुप्पी क्यों साधे हुए है?
प्रशासन का आश्वासन: क्या बच पाएगा झींकपानी का वजूद?
मजदूरों के इस आक्रोश और पैदल मार्च के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया है। ज्ञापन सौंपने के बाद उपायुक्त मनीष कुमार ने मजदूर प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि मामला बेहद गंभीर है। पश्चिमी सिंहभूम उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि मजदूरों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। इस मामले को तत्काल प्रभाव से राज्य सरकार और संबंधित उच्चाधिकारियों के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि यह संयंत्र बंद न हो और स्थानीय लोगों का रोज़गार सुरक्षित रहे।

