अब सिर्फ कुंडली नहीं, शादी से पहले हो रही कैरेक्टर और क्रिमिनल रिकॉर्ड की जांच… लेकिन शादी के बाद क्या?

KK Sagar
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बदलते दौर में बढ़ा प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन का ट्रेंड, परिवार सोशल मीडिया, कर्ज और बैकग्राउंड तक खंगाल रहे हैं।

बदलते समय के साथ शादी-विवाह को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक समय था जब रिश्ता तय करने से पहले सिर्फ कुंडली मिलान को अहम माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। हाल के वर्षों में सामने आए चर्चित धोखाधड़ी और हत्या के मामलों के बाद परिवार शादी से पहले होने वाले दूल्हा-दुल्हन की पूरी पृष्ठभूमि की जांच कराने पर जोर दे रहे हैं।

अब केवल कुंडली मिलान ही नहीं, बल्कि होने वाले जीवनसाथी का कैरेक्टर, क्रिमिनल रिकॉर्ड, आर्थिक स्थिति, कर्ज, सोशल मीडिया गतिविधियां और फैमिली बैकग्राउंड भी जांचा जा रहा है। परिवार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में वैसा ही है जैसा वह खुद को दिखा रहा है।

दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन का चलन तेजी से बढ़ा है। दक्षिण दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस स्थित एक निजी डिटेक्टिव एजेंसी के अनुसार, पहले जहां हर महीने 10 से 15 ऐसे मामले आते थे, वहीं अब इनकी संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। शादी से पहले बैकग्राउंड जांच कराने वालों की संख्या में करीब 30 से 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि अब बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों से भी ऐसे मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत लोग कैरेक्टर, सोशल स्टेटस और फैमिली बैकग्राउंड की जांच कराते हैं, जबकि बाकी मामलों में आपराधिक रिकॉर्ड, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य कानूनी पहलुओं की पड़ताल की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूक्लियर फैमिली का बढ़ता चलन, सोशल मीडिया के जरिए बने रिश्ते और हाल के हाई-प्रोफाइल मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि अब केवल अरेंज मैरिज ही नहीं, बल्कि लव मैरिज में भी परिवार अपने बच्चों के होने वाले जीवनसाथी का प्री-मैरिटल बैकग्राउंड चेक कराने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बदलते दौर में शादी अब सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता का भी रिश्ता बनती जा रही है। ऐसे में कुंडली के साथ-साथ सच्चाई की पड़ताल भी विवाह प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनती दिखाई दे रही है।

हालांकि शादी से पहले प्री-मैरिटल वेरिफिकेशन का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि शादी के बाद रिश्तों में आने वाली दरारों का समाधान क्या है? आखिरकार किसी व्यक्ति का बैकग्राउंड जान लेना भविष्य की हर परिस्थिति की गारंटी नहीं हो सकता।

बीते कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां शादी के बाद पति-पत्नी के बीच अविश्वास, विवाहेतर संबंध, सोशल मीडिया के जरिए बढ़ती नजदीकियां, आर्थिक विवाद या अन्य कारणों ने रिश्तों को इस कदर प्रभावित किया कि मामला हिंसा, हत्या या कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया। ऐसे मामलों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि केवल शादी से पहले की जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रिश्ते को निभाने की समझ और आपसी विश्वास भी उतना ही जरूरी है।

अक्सर जब रिश्तों में खटास आने लगती है, मन में संदेह घर कर जाता है और विश्वास की जगह शक ले लेता है, तब कहानी एक नए मोड़ पर पहुंचती है। इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप, एक-दूसरे की गतिविधियों पर नजर रखना, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और निजी चैट की जांच जैसी बातें रिश्तों का हिस्सा बनने लगती हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जो इस बात का संकेत है कि आधुनिक जीवनशैली के बीच रिश्तों में संवाद और भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।

बहरहाल, चाहे शादी से पहले की जांच हो या शादी के बाद रिश्तों को संभालने की चुनौती, अंततः सबसे महत्वपूर्ण आधार विश्वास, सम्मान और पारदर्शिता ही हैं। भारतीय परंपरा में विवाह को केवल दो व्यक्तियों का साथ नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और आत्माओं का पवित्र मिलन माना गया है। भगवान को साक्षी मानकर बंधे इस रिश्ते की मजबूती तभी बनी रह सकती है, जब पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति ईमानदार रहें, संवाद बनाए रखें और किसी तीसरे व्यक्ति को अपने वैवाहिक जीवन में अनावश्यक दखल देने का अवसर न दें। विश्वास और समर्पण ही किसी भी वैवाहिक रिश्ते को उसकी अंतिम मंजिल तक मजबूती से पहुंचाने की सबसे बड़ी नींव हैं।

कमल कि कलम से ✍️…

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उत्कृष्ट, निष्पक्ष, पारदर्शिता और ईमानदारी - पत्रकारिता की पहचान है k k sagar....✍️....