डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर:पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका और उसके आस-पास के इलाकों में मलेरिया का प्रकोप तेजी से फैला है। हालांकि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी के बाद अब स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है। जिले में बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे जांच अभियान के बाद संक्रमण की दर में गिरावट दर्ज की गई है। उपायुक्त राजीव रंजन खुद इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक इस सीजन में अब तक मलेरिया से 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है (3 मौतें एमजीएम में और 1 निजी अस्पताल में)। वहीं अब तक कुल 840 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए जा चुके हैं।
आंकड़ों में समझें जिले का हाल
कुल जांच और संक्रमित: अब तक 12,872 लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया है, जिनमें से 840 मरीज मलेरिया पॉजिटिव मिले।
सदर अस्पताल की स्थिति: जून में 59 और जुलाई में अब तक 14 मरीज भर्ती हुए हैं (कुल 73)।
डिस्चार्ज व रेफर: भर्ती मरीजों में से 31 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं, 39 की स्थिति स्थिर है, जबकि 3 को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।
कहां मिले कितने मरीज?
सदर अस्पताल में भर्ती कुल मरीजों में सबसे ज्यादा 23 मरीज अकेले पोटका प्रखंड के हैं। इसके अलावा गोलमुरी सह जुगसलाई से 10, डुमरिया से 4 और मुसाबनी प्रखंड से 2 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
मैदान में उतरे MGM के 125 डॉक्टर, 17 हजार से अधिक घरों का सर्वे
मलेरिया की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने मल्टी-लेवल अभियान छेड़ रखा है:
विशेष कैंप: 29 जून से 3 जुलाई के बीच एमजीएम मेडिकल कॉलेज के 125 डॉक्टरों की टीम ने पोटका, मुसाबनी, डुमरिया और घाटशिला के प्रभावित गांवों में विशेष जांच अभियान चलाया।
घर-घर दस्तक: सहिया कार्यकर्ताओं ने प्रभावित प्रखंडों के 17,741 घरों का दौरा कर लोगों की स्क्रीनिंग की और उन्हें जागरूक किया।
बॉर्डर पर नजर: पोटका से सटे अन्य प्रखंडों के 54 सीमावर्ती गांवों में भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार कैंप कर बुखार पीड़ितों को दवाएं बांट रही हैं।
एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह: ब्रेन मलेरिया से डरें नहीं, पर लापरवाही भी न बरतें
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा कि जिले में फिलहाल ब्रेन मलेरिया का एक भी मरीज नहीं है। आम बोलचाल में जिसे ब्रेन मलेरिया कहा जाता है, वह चिकित्सकीय भाषा में सेरेब्रल मलेरिया है। यह प्लाज्मोडियम फाल्सीपैरम परजीवी के कारण होता है। समय पर इलाज न मिलने पर ही यह मस्तिष्क तक पहुंचता है। अगर सही समय पर जांच हो जाए, तो मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
लगातार तेज बुखार और शरीर में कंपकंपी होना।
तेज सिरदर्द और उल्टी आना।
बेहोशी छाना या भ्रम की स्थिति होना।
उपायुक्त की अपील: खुद डॉक्टर न बनें, तुरंत जांच कराएं
उपायुक्त राजीव रंजन ने प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर फॉगिंग, नाली सफाई और आईआरएस (मच्छरमार छिड़काव) कराने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में मच्छरदानियों का वितरण भी किया जा रहा है। DC ने आम जनता से अपील की है कि बुखार आने पर मेडिकल स्टोर से खुद दवा खरीदकर खाने की भूल न करें। तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर मुफ्त जांच कराएं। सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आस-पास पानी जमा न होने दें और स्वास्थ्य विभाग की टीम का सहयोग करें।

