बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। इस बीच बीजेपी के उम्मीदवार बदलने की चर्चा जोरों से हो रही है। गुरुवार, 09 जुलाई को अभिषेक बंटी का नामांकन दिखाल किया और 24 घंटे के अंदर 10 जुलाई उन्होंने नाम वापस ले लिया। जिसके बाद बांकीपुर सीट पर बीजेपी के नये कैंडिडेट नीरज कुमार सिन्हा के नाम की घोषणा कर दी। अब सवाल है कि प्रत्याशी के बदलने के पीछे की असली वजह क्या है?
अभिषेक बोले- पारिवारिक कारणों से छोड़ा चुनावी मैदान
अभिषेक बंटी ने शुक्रवार शाम एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि वह पारिवारिक कारणों से चुनावी मैदान से हट रहे हैं। अभिषेक कुमार सिन्हा ने नाम वापसी की घोषणा के साथ ही प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी से मुलाक़ात की। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को इस बारे में पत्र दिया है, जिसमें उन्होंने एनडीए का प्रत्याशी बनाए जाने और भरोसा जताए जाने के लिए केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने लिखा है, “विनम्रता के साथ आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि मैं पारिवारिक कारणों से विधानसभा उप चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं।” साथ ही उन्होंने कहा है कि कार्यकर्ता के नाते वो निष्ठापूर्वक सेवा देते रहेंगे।
बड़े विवाद से बचने के लिए बीजेपी का बड़ा कदम
अभिषेक बंटी ने हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके पीछे ‘पारिवारिक कारणों’ का हवाला दिया है, लेकिन अंदरखाने की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी ने यह कदम किसी मजबूरी या पारिवारिक कारण से नहीं, बल्कि एक बड़े विवाद से बचने और चुनावी जोखिम को शून्य करने के लिए उठाया है। सूत्रों की मानें, तो बीजेपी को इनपुट मिला था कि अभिषेक बंटी का परिवार “चारा घोटाले” से जुड़ा रहा है। यदि ये मुद्दा पीके उठा देते हैं, तो पार्टी को नुकसान हो जाएगा
अभिषेक बंटी का परिवार “चारा घोटाला” में दोषी
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बीजेपी नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर स्वीकार किया है कि अभिषेक बंटी के परिवार को “चारा घोटाला” में दोषी ठहराया गया था। जानकारी के मुताबिक चारा घोटाला से जुड़े मामले में अभिषेक बंटी के पिता रविंद्र प्रसाद और मां चंचला सिन्हा का नाम आया था। बीजेपी के शीर्ष नेताओं को पूर्व में इसकी जानकारी नहीं थी। रविंद्र प्रसाद सिन्हा ‘मेसर्स मगध केमिकल्स कॉर्पोरेशन’ नाम की एक कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। इस कंपनी पर चारा घोटाले के दौरान फर्जी बिलों के आधार पर अवैध सप्लायर बनने और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने का गंभीर आरोप था। इस मामले में रविंद्र प्रसाद सिन्हा पर मुकदमा चला और वे दोषी साबित हुए।
आनन-फानन में कैंडिडेट बदला गया
बताया जा रहा है कि बीजेपी के शीर्ष नेताओं को पूर्व में इसकी जानकारी नहीं थी। जैसे ही केंद्रीय नेतृत्व तक ये बात पहुंची, आनन- फानन में कैंडिडेट बदल दिया गया। जैसे ही अभिषेक बंटी ने पीछे हटने का ऐलान किया। इससे पहले दोपहर में एनडीए नेताओं की अहम बैठक हुई। अचानक शाम में अभिषेक बंटी ने मीडिया को संबोधित किया।
अभिषेक की शिक्षा को लेकर भी असहज हुई बीजेपी
सिर्फ चारा घोटाला ही नहीं बल्कि अभिषेक बंटी के नामांकन फॉर्म में भी भारी गड़बड़ी की बात सामने आई थी। अभिषेक की शिक्षा को लेकर भाजपा असहज हो गई थी। अभिषेक बंटी ने अपने नॉमिनेशन पेपर में खुद को 10वीं पास बताया था। नामांकन के समय दाखिल शपथ पत्र में पटना शहर के निवासी अभिषेक ने बिहार बोर्ड छोड़कर संस्कृत शिक्षा बोर्ड के एक अज्ञात जैसे ग्रामीण संस्कृत विद्यालय से मध्यमा की पढ़ाई। बताया जा रहा है कि भाजपा अभिषेक की शिक्षा पर ही असहज हुई और उसे पता चला कि बगैर सारी जानकारी जुटाए ही उसने यह नाम घोषित कर गलती कर दी थी।

