बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव पूरे देश और राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह सीट जीतना सिर्फ एक विधायक की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक साख और सियासी गढ़ को बचाए रखने का चैलेंज है। जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने यहां से चुनाव लड़ने का फैसला कर बीजेपी की धड़कनें बढ़ा दी है। यही वजह है कि बीजेपी का पूरा फोकस अब इसी पर है।
बांकीपुर के लिए बनेगी अभेद्य रणनीति
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार शाम अपने पटना पहुंचे। पटना पहुंचते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। देर रात तक मीटिंग का सिलसिला चला। अब नितिन नवीन मंगलवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और बांकीपुर के स्थानीय नेताओं के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बांकीपुर सीट पर जीत का अंतर बढ़ाने और चुनावी तैयारियों को अभेद्य बनाने की रणनीति तैयार करना है।
नितिन नवीन ने संभाला मोर्चा
बीजेपी की प्रतिष्ठा से जुड़ चुकी इस बेहद वीआईपी सीट पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सीधे तौर पर चुनावी रण में मोर्चा संभाल लिया है। बांकीपुर का उपचुनाव बीजेपी के लिए काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि बिहार में बीजेपी के सीएम बनने के बाद पहला चुनाव हो रहा है। बांकीपुर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की कर्मभूमि भी है।
नितिन के राज्यसभा जाने से खाली हुई बांकीपुर सीट
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, जिसे पार्टी किसी भी हाल में खोना नहीं चाहती है। नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद ये विधानसभा सीट खाली हुई थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव की घोषणा की गई।
1995 से लगातार बीजेपी का कब्जा
इस विधानसभा सीट पर वर्ष 1995 से लगातार भारतीय जनता पार्टी का ही कब्जा रहा है। उस वक़्त ये सीट पटना पश्चिम कहलाती थी। साल 2008 में परिसीमन के बाद ये सीट बांकीपुर कही जाने लगी। 1995 में यहां से नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा ने जीत हासिल की थी। साल 2005 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नवीन किशोर सिन्हा का निधन हो गया था। जिसके बाद नितिन नवीन ने अपनी राजनीतिक पारी बांकीपुर से शुरू की। साल 2006 से 2025 तक नितिन नवीन ही इस सीट से जीतते रहे।

