डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : ₹25,185.51 करोड़ रुपये के भारी-भरकम लोन वेवर से जुड़े टैक्स असेसमेंट मामले में टाटा स्टील को बड़ी कानूनी राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंपनी की याचिका को फिर से बहाल कर दिया है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी आधिकारिक जानकारी में बताया कि मामले की पिछली सुनवाई 20 जुलाई को हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने याचिका बहाल करते हुए अगली सुनवाई के लिए 19 अगस्त की तारीख तय की है।
नए कानून को चुनौती दे सकेगी कंपनी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका बहाल करने के साथ-साथ टाटा स्टील को यह भी अधिकार दिया है कि वह फाइनेंस एक्ट 2026 के उस हालिया संशोधन की संवैधानिक वैधता को अदालत में चुनौती दे सके, जिसके दम पर आयकर विभाग ने इस बंद हो चुके मामले को दोबारा खोला है। कंपनी का कहना है कि मेरिट (गुण-दोष) के आधार पर हमारा पक्ष पूरी तरह मजबूत है। आयकर या कॉर्पोरेट कानून में हुए किसी भी बदलाव का हमारे मूल कानूनी तर्कों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
जानिए क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला असेसमेंट ईयर 2019-20 से जुड़ा हुआ है।
आयकर विभाग का स्टैंड: आयकर विभाग ने टाटा स्टील भूषण लिमिटेड (जिसका अब टाटा स्टील में विलय हो चुका है) को ₹25,185.51 करोड़ के लोन वेवर के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया था। विभाग का तर्क था कि इस कर्ज माफी को कंपनी की कर-योग्य आय में जोड़ा जाना चाहिए।
टाटा स्टील की चुनौती: कंपनी ने मार्च 2025 में इस नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी और कहा कि आयकर विभाग ने बिना अपने अधिकार क्षेत्र के यह नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट का पिछला फैसला: अगस्त 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने टाटा स्टील के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इनकम टैक्स विभाग के उस नोटिस को पूरी तरह रद्द कर दिया था। हालांकि वित्त अधिनियम 2026 में हुए संशोधन के बाद यह मामला दोबारा सामने आया, जिस पर अब 19 अगस्त को नए सिरे से कानूनी जंग देखने को मिलेगी।

