संसद परिसर में पप्पू यादव के साधु वेश में प्रदर्शन पर शुरू हुआ विवाद, संत समाज नाराज

Neelam
By Neelam
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बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मुद्दे पर संसद परिसर में प्रदर्शन किया। पप्पू यादव साधु के भेष में पहुंचे थे और संसद परिसर के बाहर बैठ गए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पप्पू यादव के प्रदर्शन में साथ दिया। जबकि समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भी इस मुद्दे में पप्पू यादव के साथ दिखे। अब इस पूरे मामले में संत समाज की नाराजगी सामने आई है।

विपक्ष के प्रदर्शन पर संत समाज नाराज

लोकसभा में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर दान राशि से जुड़े मुद्दे को उठाया। उनकी इस शैली को लेकर संत समाज में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या, मथुरा समेत कई धार्मिक स्थलों के संतों और महंतों ने इस घटना की आलोचना करते हुए इसे संसद की गरिमा और सनातन परंपरा का अपमान बताया है।

साधु-संतों और भगवा वस्त्र का अपमान- जितेंद्रानंद सरस्वती

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने इसे साधु-संतों और भगवा वस्त्र का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को सरकार या भाजपा का अधिकार है। लेकिन साधु-संतों क वेशभूषा का उपयोग कर पूरे संत समाज पर चोरी का आरोप लगाने जैसा संदेश अनुचित है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के कार्रवाई की मांग की। 

विपक्ष ने सनातन परंपरा का अपमान किया-साक्षी महाराज

वहीं, भाजपा सांसद और संत साक्षी महाराज ने कहा कि विपक्ष ने सनातन परंपरा का अपमान किया है। उन्होंने कहा, देश की आजादी से लेकर विभाजन तक और विभाजन से आज तक कांग्रेस और अब प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और पूरा विपक्ष लगातार संतों, भगवा और सनातन का अपमान करता आया है। उनका मानना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर इस तरह का प्रदर्शन उचित नहीं है और इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष को कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।  

संत समाज की भावनाओं को पहुंची ठेस

मथुरा स्थित चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने भी कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि संसद में हुई यह घटना बेहद शर्मनाक है। उनके अनुसार एक सांसद के पद की अपनी गरिमा होती है और भगवा वस्त्र पहनकर इस प्रकार का प्रदर्शन करना सम्मानजनक नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इससे सनातन संस्कृति और संत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है।

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