बिहार विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार का सियासी पारा हाई हो गया है। इस इस्तीफे को बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि देवेश कुमार का यह इस्तीफा उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री पद को बचाने के लिए हुआ है।
देवेश की जगह दीपक को विधान परिषद भेजने का जुगाड़!
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार ने शुक्रवार को अचानक एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था, लेकिन उन्होंने पहले ही पद त्याग दिया। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और वर्तमान पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को दी जाएगी। मुख्यमंत्री निवास में बैठक के बाद फैसले पर सहमति बनी। देवेश कुमार के बचे हुए कार्यकाल के लिए दीपक कुमार विधान परिषद भेजे जा रहे हैं।
दीपक प्रकाश को बचाने के लिए बड़ा फैसला
अचानक उठाए गए इस कदम से उनके समर्थक और क्षेत्रीय लोग हैरान हैं तथा इस्तीफे के पीछे की असली वजहों को लेकर कयास लगा रहे हैं। माना जा रहा है कि बिना एमएलए-एमएलसी बने पहले नीतीश सरकार और फिलहाल सम्राट सरकार में मंत्री की कुर्सी संभाल रहे दीपक प्रकाश को बचाने के लिए ऐसा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा सख्त टिप्पणी की थी। इसे लेकर दिल्ली से पटना तक मंथन कर फैसला लिया गया।
दीपक प्रकाश के साथ क्या है परेशानी?
बता दें कि दीपक प्रकाश का मंत्री पद खतरे में है। उनके मंत्री पद पर बना संवैधानिक संकट की वजह है उनका किसी भी सदन का सदस्य हुए मंत्री बनना। दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने थे, तब वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। 6 महीने के अंदर विधायक या विधान पार्षद बनन अनिवार्य था, लेकिन उसी बीच 14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और कैबिनेट स्वत: भंग हो गई। बिहार के नए सीएम बने और 7 मई 2026 को जब मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो दीपक प्रकाश को फिर से मंत्री बनाया गया, लेकिन इस बार भी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है और उनकी कुर्सी खतरे में दिख रही है।

