डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: अपराध की दुनिया छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा रखने वाले कैदियों के लिए जमशेदपुर का घाघडीह केंद्रीय कारा एक नई उम्मीद बनने जा रहा है। जेल प्रशासन कैदियों के पुनर्वास और उनमें सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू कर रहा है। इसके तहत जेल परिसर में ओपन बैरक (खुला बंदी गृह) स्थापित किया जाएगा, जहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को दिन के समय बाहर जाकर काम करने और रोजगार कमाने की आजादी मिलेगी। गृह, कारा व आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश पर तैयार की गई इस योजना की विस्तृत रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है।
क्या है योजना और कैसे मिलेगी काम की छूट?
प्रारंभिक चरण में घाघडीह जेल के दो वार्डों को ओपन बैरक में बदला जाएगा। इसके लिए अच्छे व्यवहार वाले लगभग 50 बंदियों का चयन किया जाएगा।
दिन में रोजगार, शाम को वापसी: चयनित कैदी सुबह अपने काम या नौकरी के लिए बाहर जा सकेंगे और काम खत्म करके शाम को उन्हें वापस जेल लौटना अनिवार्य होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: बाहर काम करने जाने वाले कैदियों को जेल प्रशासन को यह स्पष्ट बताना होगा कि वे किस संस्थान या कंपनी में काम कर रहे हैं।
कड़े नियम: अगर कोई बंदी दिए गए दिशा-निर्देशों या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
किन कैदियों को मिलेगा इस अवसर का लाभ?
ओपन बैरक के लिए चयन प्रक्रिया काफी पारदर्शी और सख्त होगी। गृह विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित चयन समिति अंतिम नाम तय करेगी।
सजा और आचरण: प्राथमिक रूप से उन कैदियों को चुना जाएगा जिन्होंने अपनी सजा का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है और जेल में रहने के दौरान जिनका व्यवहार किसी विवाद, मारपीट या अनुशासनहीनता से दूर रहा हो।
गंभीर अपराधियों को राहत नहीं: जघन्य अपराधों में शामिल कैदियों या जिनके भागने की आशंका हो, उन्हें इस योजना से पूरी तरह अलग रखा जाएगा।
ओपन बैरक का मुख्य मकसद: मानसिक तनाव कम करना और परिवार को सहारा
पारंपरिक जेलों के विपरीत ओपन बैरक में ऊंची दीवारें, सलाखें या कड़ा सुरक्षा पहरा नहीं होता। यह कैदियों में जिम्मेदारी का अहसास जगाने और उनका सामाजिक पुनर्वास सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता: दिन में काम करने की छूट मिलने से कैदी न केवल काम का अनुभव हासिल करेंगे, बल्कि अर्जित कमाई से अपने परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य में सुधार: जेल से बाहर निकलकर काम करने से बंदियों का मानसिक तनाव कम होगा और उनमें सकारात्मक सोच का विकास होगा।
पुनर्वास में आसानी: सजा पूरी होने के बाद जब ये कैदी पूरी तरह आजाद होंगे, तो उन्हें आम नागरिक की तरह समाज में ढलने और अपनी आजीविका चलाने में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

