झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच JSSC CGL के चयनित अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने JSSC CGL के साथ CDPO नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर भी रोक लगा दी है। इसके बाद CGL परीक्षा के जरिए चयनित 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति और नौकरी पर तत्काल मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। सरकार के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों में अपनी नौकरी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर JSSC CGL समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। इसके खिलाफ CGL से चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
अभ्यर्थियों ने अपनी याचिका में कहा कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषियों की पहचान की जानी चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया रद्द करने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा, जिन्होंने मेहनत के दम पर परीक्षा पास की है।
सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठे सवालों के आधार पर जांच को जरूरी बताया गया है। वहीं, चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के तहत परीक्षा दी और चयन प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उनका तर्क है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि सभी सफल अभ्यर्थियों को उसका खामियाजा भुगतना पड़े।
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद JSSC CGL के चयनित 1,932 अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आगे की सुनवाई में इस पर तस्वीर और स्पष्ट होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

