झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंपई सोरेन ने आज एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार ने छात्रों के आंदोलन और परीक्षा रद्द करने के मामले को संभाला और धोखा दिया, उससे वे बेहद दुखी हैं। उन्होंने झारखंड आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि राज्य गठन के 26 साल बाद भी नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं आ सकी है।
राज्य की वर्तमान गठबंधन सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में भारी अनियमितताएं रही हैं। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों ने लंबे समय तक आंदोलन किया। यह राज्य का सबसे बड़ा आंदोलन था, जिसमें झारखंड के लगभग सभी हिस्सों से छात्र राजधानी रांची पहुंचे थे।
चंपई सोरेन ने छात्रों के अधिकारों की बात उठाते हुए कहा कि उनकी मुख्य मांग परीक्षा धांधली की जांच CBI से कराने की थी। लेकिन सरकार ने छात्रों के साथ चालाकी की और परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर आंदोलन को खत्म कराने की कोशिश की। JPSC एक संवैधानिक संस्था है और CID की जांच में भी कई लोगों को दोषी पाया गया है। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार ने CBI जांच क्यों नहीं कराई और आरोप लगाया कि मामले को कमजोर करने की नीयत से इससे परहेज किया गया।
संवैधानिक संस्थाओं की गिरती साख पर चिंता जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि JPSC का कामकाज प्रभावित होना झारखंड के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण राज्य में नौकरियों की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं और लाखों-करोड़ों रुपये में नौकरियां बेचे जाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। परीक्षा रद्द किए जाने पर उन्होंने कहा कि इसकी एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, लेकिन छात्रों को जल्दबाजी में यह कहकर आंदोलन खत्म करने की कोशिश की गई। इसके बावजूद छात्र अपने घर नहीं गए और 24 जिलों में विरोध प्रदर्शन के दौरान उन पर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं।
छात्रों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि युवाओं का अपना आंदोलन है। सरकार की मंशा छात्रों के साथ न्याय करने की नहीं है और वह अदालत की प्रक्रिया का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। झारखंड जिस उद्देश्य और सपनों के साथ अलग राज्य बना था, वह सपना अभी पूरा नहीं हुआ है। सरकार को 15 सितंबर तक अदालत में जवाब दाखिल करना है और वह आंदोलन को कमजोर करने में जुटी है।
प्रेस वार्ता के समापन पर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य की जनता सरकार के इन तानाशाही फैसलों का करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि JPSC के चेयरमैन समेत कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है और कुछ लोगों को बचाने की कोशिश भी की जा रही है। अंत में चंपई सोरेन ने कहा कि वे छात्रों के साथ मजबूती से खड़े हैं और युवाओं को न्याय मिलना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में यह आंदोलन जनांदोलन का रूप ले सकता है।

