डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : देश को साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए कोलकाता एक बड़े मंथन का गवाह बनने जा रहा है। आगामी छह और सात सितंबर को साल्टलेक स्थित सीएसआइआर-आइआइसीबी परिसर में छठे ‘राइज कान्क्लेव 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस दो दिवसीय महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक घरानों और नए स्टार्टअप्स को एक ही मंच पर लाकर देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को पंख देना है।
केंद्रीय मंत्री करेंगे शुभारंभ, दिग्गजों का लगेगा जमावड़ा
इस प्रतिष्ठित आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह करेंगे। उनके साथ इस मंच पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, राज्य के विज्ञान व प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. कल्याण चक्रवर्ती और सीएसआइआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी जैसे कई नामचीन चेहरे मौजूद रहेंगे। खास बात यह है कि इस बार इस महामंच पर पड़ोसी राज्य ओडिशा के नवोन्मेषक और प्रतिभागी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
‘4एम’ फॉर्मूले पर टिकेगा पूरा मंथन
कोलकाता में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सीएसआइआर के चार प्रमुख संस्थानों के निदेशकों—सीएसआइआर-सीजीसीआरआइ के प्रो. बिक्रमजीत बसु, सीएसआइआर-आइआइसीबी की प्रो. विभा टंडन, सीएसआइआर-आइएमएमटी भुवनेश्वर के डॉ. रामानुज नारायण और सीएसआइआर-सीएमईआरआइ दुर्गापुर के डॉ. नरेश चंद्र मुर्मू ने इस कान्क्लेव की रूपरेखा साझा की।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा सम्मेलन ‘4एम’ यानी मिनरल्स (खनिज), मेडिकल (चिकित्सा), मैटेरियल्स (पदार्थ) और मशीनरी (मशीन) के मूल मंत्र पर काम करेगा। पूर्वी भारत के खनिज गलियारे और औद्योगिक संभावनाओं को भुनाने के लिए इस कान्क्लेव को एक गेम-चेंजर माना जा रहा है।
बिना शुल्क के मिलेगा स्टार्टअप्स को बड़ा अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विज्ञान को उद्योग से जोड़ने’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए आयोजित इस सम्मेलन में प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रखा गया है। शुरुआती रुझान बेहद उत्साहजनक हैं और अब तक 1,062 लोग इसके लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। आयोजकों को उम्मीद है कि इस आयोजन में 150 से अधिक स्टार्टअप्स समेत 800 से ज्यादा दिग्गज प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।
तकनीक हस्तांतरण और मेंटॉरशिप पर रहेगा जोर
अक्सर देखा गया है कि शानदार रिसर्च लैब की चार दीवारों में ही दम तोड़ देती हैं। राइज कान्क्लेव इसी खाई को पाटने का काम करेगा। यह मंच शोधकर्ताओं, निवेशकों, एमएसएमई इकाइयों और नीति-निर्माताओं को सीधे संवाद का मौका देगा। तकनीक के कमर्शियल इस्तेमाल, लाइसेंसिंग, फंडिंग और स्टार्टअप्स को मेंटॉरशिप मुहैया कराने पर विशेष जोर रहेगा ताकि स्वदेशी तकनीकों को प्रयोगशाला से सीधे बाजार तक पहुंचाया जा सके।

