पहाड़ पर बसा है कुंडीलपुर गांव
पलामू: जिले के मनातू प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रंगेया पंचायत के ग्राम कुंडीलपुर में आजादी के कई साल बीत जाने के बाद भी मौलिक समस्याएं बनी हुई हैं। करीब 300 मीटर ऊंचे पहाड़ पर बसा यह गांव मनातू प्रखंड कार्यालय से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताया गया है। वहीं, रंगेया पंचायत सचिवालय मनातू प्रखंड मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है।
सड़क नहीं, पगडंडियों के सहारे आवागमन
ग्रामीणों के अनुसार गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। लोग पगडंडियों के सहारे बाजार, जिला मुख्यालय और प्रखंड कार्यालय आते-जाते हैं। गांव तक पहुंचने के रास्ते में आधा दर्जन से अधिक नदी-नालों को पार करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और कठिन हो जाती है और ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित होता है।
चुनाव के समय आते हैं नेता, फिर भूल जाते हैं गांव
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं रहने के कारण विधायक, सांसद और प्रशासनिक अधिकारी गांव आना नहीं चाहते। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता चुनाव के दौरान वोट मांगने पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव के बाद कुंडीलपुर आना भूल जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
25 से 30 घरों में रहते हैं एससी-एसटी समुदाय के लोग
ग्रामीणों के अनुसार कुंडीलपुर में वर्ष 1920 से लोग रह रहे हैं। गांव में करीब 25 से 30 घर हैं, जिनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं। सरकारी सुविधा के नाम पर गांव में राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय है।
जर्जर स्कूल की छत से टपकता है पानी
गांव के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पांच शिक्षक हैं और करीब 100 से 120 बच्चे पढ़ते हैं। यहां कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाई होती है। विद्यालय की स्थिति जर्जर बनी हुई है। सभी कक्षाओं की छत से पानी टपकता है। ऐसे में बच्चे जोखिम के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्कूल में चापाकल नहीं, एक किलोमीटर दूर से आता है पानी
विद्यालय में चापाकल की सुविधा भी नहीं है। स्कूल की रसोइया करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर खाना बनाती है। विद्यालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को करना पड़ता है लंबा सफर
ग्रामीणों के अनुसार आठवीं के बाद बच्चे पहाड़ी क्षेत्र से होकर करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर सलैया जैसे शहरी क्षेत्रों में पढ़ने जाते हैं। वहीं, हाई स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों को 100 से 200 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है।
इलाज के लिए खटिया पर ले जाते हैं मरीज
कुंडीलपुर में स्वास्थ्य सुविधा का भी अभाव है। ग्रामीणों को उप स्वास्थ्य केंद्र जाने के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों को खटिया पर टांगकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ चुके हैं।
अब भी बिजली से वंचित है गांव
ग्रामीणों के अनुसार गांव में अब तक बिजली नहीं पहुंची है। लोगों को ढिबरी के सहारे जीवन गुजारना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली पहुंचाने की योजनाओं के बावजूद कुंडीलपुर में अब तक बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन, सुविधा का इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पहले पलामू के डीसी सहित अन्य आला अधिकारी गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी है।
प्रधानाध्यापक ने भी बतायी विद्यालय की समस्या
विद्यालय के प्रधानाध्यापक सह सचिव बिंदेश्वर कुमार ने बताया कि स्कूल की छत जर्जर होने के कारण पानी टपकता है। बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय में चापाकल भी नहीं है, जिससे बच्चों को पानी पीने में परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि विद्यालय की सभी कमियों से अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

