डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर:₹734 करोड़ के बहुचर्चित फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर के प्रमुख स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल (उर्फ बबलू जायसवाल) और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक की गई जांच और छापेमारी से कई चौकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी और भारी जब्ती
प्रवर्तन निदेशालय की एंटी मनी लॉन्ड्रिंग टीम ने 70 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ जमशेदपुर के बिष्टुपुर, आदित्यपुर-गम्हरिया, कोलकाता और देवघर समेत कुल छह ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। सुरक्षा के कड़े इंतजाम के तहत सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया था।
बिष्टुपुर के कांट्रैक्टर्स एरिया स्थित ज्ञानचंद जायसवाल के मुख्य आवास, बीएस टॉवर स्थित उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय पारेख के कार्यालय और प्लांट-कार्यालयों की सघन तलाशी ली गई। इस दौरान बैंक खातों के विवरण, खरीद-बिक्री के चालान, जीएसटी रिटर्न, कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन से भारी मात्रा में डिजिटल डेटा व दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
37 शेल कंपनियों के जरिए ₹5,000 करोड़ के फर्जी चालान का खेल
ED की जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे अवैध सिंडिकेट को चलाने के लिए करीब 37 शेल कंपनियां बनाई गई थी। इन फर्जी कंपनियों के माध्यम से बिना किसी वास्तविक माल की भौतिक आपूर्ति के लगभग ₹5,000 करोड़ के फर्जी चालान जारी किए गए और ₹734 करोड़ का फर्जी आईटीसी क्लेम किया गया। जीएसटी इंटेलिजेंस की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग Act (PMLA), 2002 के तहत मामला दर्ज किया था।
एजेंसी के अनुसार, इस रैकेट में अमित उर्फ निकी भालेरिया, कोलकाता के शिवकुमार देवड़ा उर्फ मोदित देवड़ा, अमित गुप्ता और अन्य लोग भी शामिल हैं। इसके अलावा, सीए संजय पारेख के कार्यालय से मिले ऑडिट पेपर्स और जीएसटी फाइलिंग लॉग्स से यह जांच की जा रही है कि फर्जी चालान जारी करने में सीए स्तर पर क्या भूमिका रही है।
एमजीएम अस्पताल में पिता-पुत्र का हाई-वोल्टेज ड्रामा
गिरफ्तारी के बाद बुधवार देर रात जब ED की टीम दोनों आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंची, तो वहां भारी हंगामा देखने को मिला। पिता-पुत्र ने खुद को झूठे मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया। इस दौरान ज्ञानचंद जायसवाल ने ब्लड प्रेशर बढ़ने और समय पर दवा न मिलने की शिकायत की। इसके बाद ED की टीम दोनों को अपने साथ सीधे रांची लेकर रवाना हो गई।
डमी डायरेक्टरों के पीछे छिपा था असली मास्टरमाइंड
ED की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बबलू जायसवाल से जुड़ी कई अन्य फर्में भी रडार पर हैं, जिनमे मेसर्स जय भोलेनाथ, मेसर्स मां शारदा पावर, मेसर्स मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स केदारनाथ टेक्सटाइल्स, मेसर्स जानदीप आयरन एंड स्टील लिमिटेड शामिल हैं। अगस्त 2025 में सरायकेला के कारोबारी परमानंद सरदार के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ था कि इन शेल कंपनियों में केवल ‘डमी डायरेक्टर’ खड़े किए गए थे, जबकि कंपनियों का असली नियंत्रण परदे के पीछे से बब्लू जायसवाल के हाथों में था। फिलहाल ED इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस फर्जीवाड़े से अर्जित काले धन का निवेश रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में कहां-कहां किया गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

