डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ हादसे को लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई है। मिलन मेला परिसर में आयोजित एक विजया सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया कि इस दुर्घटना को न तो छोटी घटना माना जाएगा और न ही किसी साजिश या षडयंत्र के नाम पर खारिज किया जाएगा। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि मानवीय चूक के कारण यह हादसा हुआ है और इसके लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: सीएम ने साफ किया कि सरकार घटना की पूरी जिम्मेदारी तय कर रही है। हाई कोर्ट के परामर्श पर गठित विशेष समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व सरकार पर निशाना: मुख्यमंत्री ने पिछली ममता बनर्जी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले की तरह इस बार पूजा आयोजनों के लिए किसी को भी हाई कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ा। लाउडस्पीकर और विसर्जन मार्गों पर लगने वाली पाबंदियां इस बार पूरी तरह खत्म थी।
घायलों के इलाज पर सफाई: घायलों को सरकारी अस्पतालों से निजी अस्पतालों में शिफ्ट करने के विवाद पर सीएम ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता घायलों को सर्वोत्तम और तुरंत इलाज मुहैया कराना थी, न कि किसी तरह का अहंकार दिखाना। सभी 25 घायलों के परिवारों को मुआवजे के चेक सौंप दिए गए हैं और वे अब स्वस्थ हैं।
आगामी त्योहारों पर विशेष सतर्कता: आगामी काली पूजा, दिवाली, छठ, जगद्धात्री और कार्तिक पूजा के दौरान प्रशासन को सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े निर्देश दिए गए हैं, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शांतिपूर्ण रहा दुर्गा पूजा का इस बार का उत्सव
चोरबागान की दुखद घटना को छोड़कर मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस बार राज्य में दुर्गा पूजा का आयोजन अब तक का सबसे शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक रहा। इस साल राज्यभर में रिकॉर्ड 58,000 से अधिक सामुदायिक और कुल 66,000 से ज्यादा दुर्गा पूजाओं का आयोजन किया गया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13,000 अधिक हैं।
बंगाल में होने वाले आगामी बड़े आयोजन
मुख्यमंत्री ने आने वाले महीनों में बंगाल में कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की रूपरेखा साझा की।
कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव: 17 से 23 दिसंबर तक।
प्रवासी भारतीय सम्मेलन: 8 और 9 जनवरी को (राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में)।
वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन (ऊर्जा सप्ताह): 27 से 31 जनवरी तक (चार दिवसीय आयोजन)।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का गंगासागर मेला: श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को सर्वोपरि रखते हुए इस बार इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाएगा।

