भारतीय रेलवे अब अपने 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को पूरी तरह बदलने जा रहा है। रेलवे मंत्रालय अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से नए AI आधारित रिजर्वेशन सिस्टम को लागू करेगा। इस नई तकनीक का मकसद टिकट बुकिंग को पहले से ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाना है।
मौजूदा रिजर्वेशन सिस्टम की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। पिछले चार दशकों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन बढ़ती ऑनलाइन बुकिंग और यात्रियों की संख्या के कारण अब रेलवे इसे पूरी तरह आधुनिक तकनीक से अपग्रेड कर रहा है। रेलवे मंत्री Ashwini Vaishnaw ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नए सिस्टम में बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
नए AI आधारित सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत वेटिंग टिकट कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन फीचर होगी। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पुराने बुकिंग डेटा, सीट उपलब्धता, सीजनल ट्रेंड और रियल टाइम डिमांड का विश्लेषण कर यह बताएगा कि वेटिंग टिकट कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार इस फीचर की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 94 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है।
रेलवे का नया सिस्टम हाई कैपेसिटी सर्वर और आधुनिक क्लाउड तकनीक पर आधारित होगा। इससे टिकट बुकिंग के दौरान वेबसाइट स्लो होने, सर्वर डाउन होने और पेमेंट फेल जैसी समस्याओं में काफी कमी आने की उम्मीद है। त्योहारों और Tatkal बुकिंग के समय भी यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
इस अपग्रेड का बड़ा फायदा RailOne ऐप को भी मिलेगा। यह ऐप रिजर्व और अनरिजर्व टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, लाइव ट्रेन स्टेटस, प्लेटफॉर्म जानकारी, कोच पोजिशन, रेल मदद और सीट पर खाना मंगाने जैसी कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराता है। रेलवे के अनुसार इस ऐप को अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और प्रतिदिन करीब 9.29 लाख टिकट इसके जरिए बुक किए जा रहे हैं।
आने वाले समय में आधार वेरिफिकेशन, तेज लॉगिन, स्मार्ट सीट अलॉटमेंट और यात्रियों के लिए पर्सनलाइज्ड सुझाव जैसे कई नए फीचर्स भी जोड़े जा सकते हैं। इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग में अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिलेगी।
भारतीय रेलवे का यह AI आधारित रिजर्वेशन सिस्टम देश के डिजिटल रेलवे मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे करोड़ों यात्रियों की यात्रा पहले से ज्यादा आसान और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।

