CNT Act उल्लंघन के आरोपों पर केंद्र-राज्य से जवाब तलब, हजारों एकड़ आदिवासी जमीन के हस्तांतरण पर उठे सवाल
झारखंड में आदिवासी भूमि की सुरक्षा को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई ने अब नया मोड़ ले लिया है। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के कथित उल्लंघन और आदिवासी जमीन को बड़े पैमाने पर मिशनरी संस्थाओं के नाम हस्तांतरित किए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार समेत कई महत्वपूर्ण संस्थाओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने मामले को गंभीर और संवेदनशील मानते हुए संबंधित पक्षों को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता विष्णु साहू द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के गुमला, सिमडेगा, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में हजारों एकड़ आदिवासी (ST) जमीन को नियमों की अनदेखी कर मिशनरी संस्थाओं GEL Mission और RC Mission Society के नाम हस्तांतरित किया गया है।
याचिका में दावा किया गया है कि जमीन का हस्तांतरण सादे कागज (Plain Paper Deed) के जरिए किया गया, जो छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की भावना और प्रावधानों के विपरीत है।
जनसांख्यिकी बदलने का भी आरोप
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि इन जमीन हस्तांतरणों के कारण प्रभावित क्षेत्रों की जनसांख्यिकी (Demography) बदल रही है। साथ ही, स्कूल और अस्पताल के नाम पर ली गई जमीन का उपयोग अब मूल उद्देश्य से अलग किया जा रहा है, जिससे स्थानीय आदिवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
किन-किन को भेजा गया नोटिस?
हाईकोर्ट ने निम्नलिखित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है—
केंद्र सरकार
झारखंड राज्य सरकार
भारत निर्वाचन आयोग
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)
गुमला, सिमडेगा, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त (DC)
सरकार के जवाब पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट की इस सख्ती से सरकारी महकमे में हलचल तेज हो गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि याचिका में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह झारखंड में आदिवासी भूमि अधिकारों से जुड़ा सबसे बड़ा कानूनी मामला साबित हो सकता है।
अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार का पक्ष सामने आएगा और यह तय हो सकता है कि मामले की विस्तृत जांच के लिए कोई विशेष समिति गठित की जाएगी या नहीं।
फिलहाल, यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला आना बाकी है।

