चाईबासा: सुदूरवर्ती इलाकों में अब नक्सलियों पर ‘डबल अटैक’, बंदूक के साथ विकास से भी घेरेगी प्रशासन

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: पश्चिमी सिंहभूम जिले के अत्यंत दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली के लिए जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों ने एक नई और प्रभावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। बुधवार को जिले के आला अधिकारियों और सीआरपीएफ के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह साफ कर दिया गया कि अब नक्सल प्रभावित इलाकों में सिर्फ सुरक्षा बल ही मोर्चा नहीं संभालेंगे, बल्कि विकास की योजनाएं भी समानांतर रूप से पहुंचेंगी।

जिला उपायुक्त मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक अमित रेनु ने चाईबासा में सीआरपीएफ डीआईजी विनोद कार्तिक से मुलाकात की। इस त्रिपक्षीय बैठक में नक्सल उन्मूलन, सुरक्षा पुख्ता करने और आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया गया।

सुरक्षा और विकास: एक सिक्के के दो पहलू
​बैठक के दौरान अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। नक्सलियों के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने के लिए केवल सैन्य अभियान काफी नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों का विश्वास जीतना भी जरूरी है।

इन मुख्य बिंदुओं पर रहा फोकस
सुरक्षा अभियानों की समीक्षा: वर्तमान में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की प्रगति को आंका गया और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन के बीच रियल-टाइम तालमेल को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा लाभ: दुर्गम इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक विशेष कार्ययोजना पर चर्चा हुई, जिसके तहत कुछ क्षेत्रों पर फोकस रहेगा।

सड़क संपर्क : ताकि सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान हो और ग्रामीणों को बाजार तक पहुंच मिले।
स्वास्थ्य और शिक्षा: अंदरूनी इलाकों में डॉक्टरों और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना।
पेयजल और आजीविका: शुद्ध पीने का पानी और ग्रामीणों के लिए रोजगार के साधन बढ़ाना।

विश्वास बहाली से मजबूत होगी शांति
​बैठक का निचोड़ यह रहा कि जब दुर्गम क्षेत्रों के लोगों को सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलने लगेंगी, तो उनका प्रशासन पर भरोसा बढ़ेगा। यह भरोसा ही नक्सलवाद की जड़ों को कमजोर करने में सबसे बड़ा हथियार साबित होगा। सरकार की इस ‘डबल-एक्शन’ नीति से आने वाले दिनों में पश्चिमी सिंहभूम के सुदूर जंगलों और पहाड़ों में बड़े बदलाव की उम्मीद है।

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