चंद्रयान-3 का दुनियाभर में बजा डंका, अमेरिका ने दिया अंतरिक्ष विज्ञान का सर्वोच्च सम्मान

Neelam
By Neelam
3 Min Read

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्र मिशन चंद्रयान-3 ने नया इतिहास रच दिया है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनाटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (एआईएए) ने ‘चंद्रयान-3 मिशन’ के लिए इसरो को गुरुवार को ‘गोडार्ड एस्ट्रोनाटिक्स’ पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने एआईएए सम्मेलन में यह पुरस्कार प्राप्त किया।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट की थी ऐतिहासिक लैंडिंग

21 मई को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को ये सम्मान प्रदान किया गया। इसरो को यह पुरस्कार ”चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट ‘चंद्रयान-3’ की ऐतिहासिक लैंडिंग के लिए दिया गया है, जिससे चंद्रमा की हमारी समझ बेहतर करने में मदद मिली है।”

इसरो और चंद्रयान 3 टीम को बधाई

क्वात्रा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एआईएए द्वारा प्रदत्त प्रतिष्ठित 2026 गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स पुरस्कार के लिए इसरो और चंद्रयान 3 टीम को बधाई। सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान राजदूत विनय क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्पेस विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए भारत की दीर्घकालिक अंतरिक्ष रणनीति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण, मानव अंतरिक्ष उड़ान और तेजी से बढ़ते वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रहा है।

चंद्रयान मिशन ने रचा था इतिहास 

23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी।भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना था।चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।इस क्षेत्र की सतह पर इससे पहले कोई मिशन नहीं पहुंच पाया था।मिशन ने भविष्य के मानव चंद्र अभियानों के लिए अहम वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध कराए।साथ ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की मिट्टी में कई महत्वपूर्ण रासायनिक तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि की थी।

चंद्रयान-3 मिशन बेहद अहम

मिशन के दौरान प्राप्त आंकड़ों ने भविष्य के मानव मिशनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराईं। इसके साथ ही दक्षिणी ध्रुवीय मिट्टी में कई अहम रासायनिक तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिससे भविष्य में चंद्र सतह पर संसाधनों के उपयोग और निर्माण गतिविधियों की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

Share This Article