धनबाद – स्कूलों की मनमानी पर कसा शिकंजा: चिन्हित दुकानों से किताब खरीदने पर रोक, डीसी की बैठक में बड़े फैसले

KK Sagar
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धनबाद। बुधवार, 22 अप्रैल को समाहरणालय में उपायुक्त धनबाद की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें जिला प्रशासन, निजी स्कूलों के प्रबंधक/प्राचार्य, उनके प्रतिनिधि और अभिभावक महासंघ के सदस्य शामिल हुए। बैठक में स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए कई सख्त और पारदर्शिता बढ़ाने वाले फैसले लिए गए।

क्या हैं बड़े फैसले?

बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब स्कूल अपनी मनमर्जी नहीं चला पाएंगे। प्रशासन ने नियमों का सख्ती से पालन कराने का संकेत दिया है—

फीस में पारदर्शिता जरूरी:

एनुअल चार्ज और डेवलपमेंट चार्ज को अलग-अलग मद में स्पष्ट करना होगा।

5 साल का ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य:

सभी स्कूलों को पिछले 5 वर्षों का अंकेक्षण प्रतिवेदन जमा करना होगा।

किताब-कॉपी लिस्ट पहले जारी:

स्कूलों को नवंबर महीने में ही किताब, कॉपी और ड्रेस की पूरी जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।

अब अभिभावकों को आखिरी समय में परेशान नहीं होना पड़ेगा।

चिन्हित दुकानों से खरीद पर रोक:

किसी विशेष दुकान से किताब खरीदने का दबाव अब नहीं चलेगा। अभिभावकों को खुली छूट मिलेगी।

शिक्षक जानकारी सार्वजनिक:

CBSE के OASIS फॉर्म के तहत शिक्षकों का नाम, वेतन और योग्यता वेबसाइट पर डालना अनिवार्य होगा।

स्कूल मैनेजमेंट कमेटी जरूरी:

CBSE नियमों के अनुसार समिति का गठन कर वेबसाइट पर अपलोड करना होगा, जिसमें 50% महिलाएं होंगी।

अतिरिक्त किताबों पर शपथ पत्र:

NCERT के अलावा अन्य पब्लिकेशन की किताबें चलाने पर स्कूल को यह शपथ देना होगा कि उनमें कोई त्रुटि नहीं है।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

बैठक में उपायुक्त के साथ DDC, DSE सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। वहीं अभिभावक महासंघ के प्रतिनिधि पप्पू सिंह, मनोज कुमार मिश्रा, रतीलाल महतो, मुकेश पांडे और प्रेम ठाकुर भी शामिल हुए।

निजी स्कूलों की ओर से दिल्ली पब्लिक स्कूल, कार्मिक नगर की प्राचार्य सरिता सिंह और राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर के प्राचार्य सुमंत मिश्र समेत कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

क्या बदलेगा अब?

इस बैठक के बाद साफ संकेत है कि अब स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त हो चुका है।

अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं स्कूलों को पारदर्शिता और नियमों का पालन करना होगा।

. सीधा संदेश: अब शिक्षा के नाम पर मनमानी नहीं, जवाबदेही तय होगी!

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