डिजिटल जनगणना 2027 शुरू, लेकिन जमीनी हकीकत कमजोर: जमुई के झाझा में बिना किट के मैदान में उतरे प्रगणक

KK Sagar
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जमुई/झाझा: बिहार में जनगणना 2027 का पहला चरण 2 मई 2026 से विधिवत शुरू हो चुका है और 31 मई तक चलेगा। सरकार इसे पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया बता रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। जमुई जिले के झाझा प्रखंड से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां प्रगणक बिना जरूरी किट और संसाधनों के ही फील्ड में काम करने को मजबूर हैं।

⚠️ बिना किट और नियुक्ति पत्र के काम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, झाझा प्रखंड में अब तक कई प्रगणकों को न तो आधिकारिक किट दी गई है और न ही अपॉइंटमेंट लेटर। यहां तक कि जनगणना से जुड़ी गाइडलाइन और प्रशिक्षण पुस्तिका भी कई जगह उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में प्रगणक खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं और सही तरीके से डेटा संग्रह करने में कठिनाई जता रहे हैं।

📱 डिजिटल जनगणना, लेकिन जमीनी तैयारी अधूरी

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल है। 17 अप्रैल से 1 मई 2026 के बीच ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) अभियान चलाया गया, जिसमें करीब 47 लाख परिवारों ने खुद ऑनलाइन जानकारी दर्ज की। मधुबनी जिला इस अभियान में सबसे आगे रहा। लेकिन अब जब घर-घर जाकर सत्यापन और मकान सूचीकरण का काम शुरू हुआ है, तो कई जगहों पर संसाधनों की कमी सामने आ रही है।

📊 जमुई में अच्छी भागीदारी, फिर भी व्यवस्था सवालों में

जमुई जिले में स्व-गणना के दौरान 1,10,698 लोगों ने हिस्सा लिया और जिला राज्य में 12वें स्थान पर रहा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों ने उत्साह दिखाया, लेकिन अब फील्ड स्तर की कमियां इस प्रक्रिया की सटीकता पर सवाल खड़े कर रही हैं।

🏛️ प्रशासन का दावा—सब कुछ व्यवस्थित

जिला पदाधिकारी नवीन के नेतृत्व में इस अभियान की शुरुआत को समावेशी विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया गया है। प्रशासन के अनुसार, प्रगणकों को हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) का सर्वे, नजरी नक्शा तैयार करने और HLO ऐप के जरिए डेटा एंट्री करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले तीन दिन केवल क्षेत्र सत्यापन और नक्शा निर्माण के लिए निर्धारित किए गए हैं।

🔐 सुरक्षा और गोपनीयता पर भी जोर

प्रशासन ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान कोई भी प्रगणक नागरिकों से बैंक डिटेल, OTP या वित्तीय जानकारी नहीं मांगेगा। लोगों से अपील की गई है कि वे केवल वैध पहचान पत्र वाले प्रगणकों को ही जानकारी दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

अब सवाल ये उठता है कि प्रगणकों की वैधता उनके अपॉइंटमेंट लेटर और आईडी कार्ड से होंगी ऐसे में कई प्रगणक के पास अभी तक उनकी वैधता सत्यापित करने के लिए अपॉइंटमेंट लेटर उपलब्ध नहीं कराई गई है जिसके बिना वो कार्य करने को विवश है ऐसे में अगर कार्य क्षेत्र में किसी भी तरह की परेशानी सामने आती है तो वो स्वयं को वैध कैसे सत्यापित करेंगे।

हालांकि इस विषय पर जब झाझा के चार्ज पदाधिकारी (जनगणना) सह प्रखंड विकास पदाधिकारी सुनील कुमार चाँद से दूरभाष पर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने अभी जमुई में ही किट की उपलब्धता नहीं होने की बात कही है।

📢 जनता से अपील

जिला प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सही और सटीक जानकारी देना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी डेटा के आधार पर भविष्य की योजनाएं और विकास कार्य तय किए जाएंगे।

❗ बड़ा सवाल

जब जनगणना जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बताई जा रही है, तो क्या बिना किट और संसाधनों के काम कर रहे प्रगणक इस मिशन को सही ढंग से पूरा कर पाएंगे?

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