स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 ke 10वां दिन भारत के लिए ऐतिहासिक रहा। बॉक्सिंग के अलग-अलग इवेंट में गोल्ड मेडल की बरसात देखने को मिली तो वहीं एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर रेस में इतिहास रच दिया।
ऐसा करने वाले पहले एथलीट बने
गुलवीर सिंह ने इस इवेंट में 13:24.95 की टाइमिंग के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। इसके अलावा गुलवीर कॉमनवेल्थ गेम्स के एथलेटिक्स में मल्टीपल मेडल जीतने वाले भारत के पहले एथलीट भी बन गए हैं। मौजूदा एशियाई चैम्पियन गुलवीर ने 28 जुलाई को 10000 मीटर में सिल्वर मेडल जीता था।
गुलवीर का अंतिम लैप में शानदार
शनिवार को उन्होंने 5000 मीटर स्पर्धा में 13 मिनट 24.95 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया। केन्या के मैथ्यू किपचुम्बा किपसांग ने 13:23.61 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 13:24.70 के साथ रजत पदक हासिल किया। गुलवीर ने अंतिम लैप में शानदार दौड़ लगाते हुए केन्या के कॉर्नेलियस केम्बोई को सिर्फ 0.04 सेकंड से पीछे छोड़कर कांस्य पदक जीता। हालांकि उनका समय उनके राष्ट्रीय रिकॉर्ड 12:59.77 और इस सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 13:03.93 से पीछे रहा।
कॉमनवेल्थ से पहले एशियन गेम्स 2022 में भी कमाल
कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले गुलवीर सिंह ने एशियन गेम्स 2022 में भी कमाल किया था। उन्होंने एशियन गेम्स में 10000 मीटर के इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसी 10000 मीटर के इवेंट में उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद फिर 5000 मीटर की रेस में भी उनका मेडल जीतना गुलवीर के करियर में एक स्वर्णिम अध्याय से कम नहीं है।
सेना में भर्ती होने के लिए की थी दौड़ने की शुरुआत
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले 27 साल के गुलवीर सिंह ने सेना में भर्ती होने के लिए दौड़ने की शुरुआत की थी, जिसमें साल 2018 में वह भारतीय सेना का हिस्सा बन गए थे। वहीं सेना में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने दौड़ना जारी रखा जिसके दम पर गुलवीर को एथलेटिक्स में हिस्सा लेने का मौका मिला। गुलवीर ने साल 2022 के एशियन गेम्स में 10 हजार मीटर दौड़ में हिस्सा लेने लिया था जिसमें वह कांस्य पदक जीतने में कामयाब रहे थे। इसके अलावा गुलवीर ने जब साल 2026 में हाफ मैराथन को सिर्फ 59 मिनट 42 सेकेंड में पूरा किया था तो वह पहले ऐसे भारतीय एथलीट बन गए जो इस दौड़ को एक घंटे से कम समय में खत्म करने में कामयाब हो सके।

