सम्राट कैबिनेट में आधे मंत्री दागी, 90 फीसदी करोड़पति, ADR रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

Reena Sharma
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बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे। जल्द ही उन्होंने राज्यसभा सांसद बनने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद बिहार में मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हुआ है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बने कैबिनेट में आधे मंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है। इस बात का खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच के ताजा रिपोर्ट में हुआ है।

ADR की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाले नए मंत्रिमंडल के गठन के बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच ने मंत्रियों के बैकग्राउंड को लेकर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी कर दी है। कुल 35 मंत्रियों में से 31 मंत्रियों के चुनावी हलफनामों के विश्लेषण के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट ने बिहार की सियासत में सियासतदानों को लेकर बहस तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सूबे के लगभग आधे मंत्रियों का दामन दागदार है, वहीं दूसरी तरफ कैबिनेट के लगभग सभी सदस्य करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं।

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29 प्रतिशत पर गंभीर आपराधिक मामले

रिपोर्ट के अनुसार, सम्रकाट चौधरी कैबिनेट के जिन मंत्रियों के शपथपत्र का विश्लेषण किया गया उनमें 15 मंत्री यानी 48 प्रतिशत ने अपने नाम पर आपराधिक मामले दर्ज होने की बात स्वीकार की है। इनमें से नौ मंत्री (29 प्रतिशत) गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा बीजेपी कोटे के मंत्रियों पर आपराधिक मामले

अगर पार्टीवार आंकड़ों को देखें तो भारतीय जनता पार्टी के सबसे अधिक 7 मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 5 मंत्रियों पर गंभीर धाराएं लगी हैं। वहीं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के 5 मंत्रियों पर आपराधिक और 2 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के दोनों मंत्रियों ने भी अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

4 मंत्रियों को शपथ पत्र देने की जरूरत ही नहीं पड़ी

एडीआर के मुताबिक, दो मंत्रियों (जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के अशोक चौधरी और भाजपा के प्रमोद कुमार) को शपथ पत्र जमा करने की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि वे विधान परिषद के मनोनीत सदस्य थे। आरएलएम के दीपक प्रकाश और जदयू के निशांत कुमार का विवरण भी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि वे वर्तमान में बिहार विधानसभा के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

कितने पढ़े लिखें हैं मंत्री?

ADR ने मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता का भी विश्लेषण किया है। 8 मंत्रियों की शिक्षा 10वीं से 12वीं के बीच है। 22 मंत्री ग्रेजुएट हैं या उससे ऊपर की शिक्षा रखते हैं। यानी उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई की है। एक मंत्री के पास डिप्लोमा है।

31 मंत्रियों में से 28 करोड़पति

रिपोर्ट में मंत्रिमंडल सदस्यों की अपार संपत्ति का भी उल्लेख किया गया है। विश्लेषण में पाया गया कि 31 मंत्रियों में से 28 करोड़पति हैं, जिनकी घोषित संपत्ति औसतन 6.32 करोड़ रुपये थी। भाजपा के रामा निषाद 31.86 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ शीर्ष पर रहे। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के संजय कुमार ने सबसे कम 22.30 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है।

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