डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : रेल मंडल मुख्यालय में सड़कों की घेराबंदी को लेकर चल रहा विवाद अब रेलवे बनाम प्रशासन के मोड़ पर आ गया है। चक्रधरपुर की एसडीओ श्रुति राजलक्ष्मी ने कड़ा रुख अपनाते हुए रेलवे के उस फैसले को पलट दिया है, जिसके तहत चार प्रमुख सड़कों पर गेट लगाकर रात में आवागमन बाधित किया जा रहा था। एसडीओ ने स्पष्ट किया कि दशकों पुराने सार्वजनिक रास्तों को बंद करना अपराध है और रेलवे को दो दिनों के भीतर सभी गेट 24 घंटे खुले रखने का आदेश दिया है।
SDO की दोटूक: ‘जनता का रास्ता रोकना अपराध’
सोमवार को अनुमंडल कार्यालय के सभागार में आयोजित एक अहम बैठक के बाद एसडीओ ने रेलवे की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा के नाम पर आम जनता को बंधक नहीं बना सकता। एसडीओ ने रेलवे प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि यदि दो दिनों के अंदर सड़कें पूरी तरह नहीं खोली गई, तो भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत रेलवे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने कहा कि रेलवे अपनी सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करे, न कि सड़कों को बंद कर जनता की परेशानी बढ़ाए।
बैठक में नहीं पहुंचे DRM, रेल अधिकारी पहुंचे देरी से
इस महत्वपूर्ण वार्ता के लिए डीआरएम तरुण हुरिया को तलब किया गया था, लेकिन वे खुद उपस्थित नहीं हुए। उनकी जगह इंजीनियरिंग विभाग और आरपीएफ के अधिकारी पहुंचे, वह भी निर्धारित समय से 45 मिनट की देरी से। प्रशासन और जनता रेल आंदोलन के पदाधिकारियों को इंतजार कराने पर भी नाराजगी देखी गई।
जनता रेल आंदोलन की बड़ी जीत
चक्रधरपुर की जनता पिछले कई दिनों से रेलवे के इस काले कानून के खिलाफ आंदोलित थी। रेलवे अस्पताल और स्टेशन जाने वाले मुख्य रास्तों पर गेट लगाए जाने से लोग त्राहिमाम कर रहे थे।
अब ट्रेनों की लेटलतीफी के खिलाफ मोर्चा
सड़कों का मुद्दा सुलझने के बाद आंदोलनकारियों ने अब अपना अगला लक्ष्य तय कर लिया है। संगठन का कहना है कि चक्रधरपुर रेल मंडल में यात्री ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह चरमरा गया है। ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं, जिससे यात्री परेशान हैं। जब तक ट्रेनें समय सारणी के अनुसार नहीं चलेंगी, चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।
बैठक में मौजूद रहे
इस दौरान मुख्य रूप से रामलाल मुंडा, विजय सिंह सुम्ब्रई, बैरम खान, संतोष मुंडा और सन्नी सुलतान खान सहित ‘जनता रेल आंदोलन’ के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे। प्रशासन के इस फैसले के बाद पूरे शहर में खुशी की लहर है।

