“री-एडमिशन के नाम पर लूट” — धनबाद में अभिभावकों का उलगुलान, 6 घंटे के उपवास के साथ अभिभावकों का धरना : प्रशासन को अल्टीमेटम

KK Sagar
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धनबाद: निजी विद्यालयों द्वारा कथित अवैध शुल्क वसूली और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी के खिलाफ मंगलवार (15 अप्रैल 2026) को रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड अभिभावक महासंघ के बैनर तले एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह (असित सिंह) ने 6 घंटे का उपवास रखकर विरोध दर्ज कराया।

धरने में शामिल अभिभावकों ने आरोप लगाया कि जिले के अधिकांश निजी विद्यालय “री-एडमिशन” के नाम पर अलग-अलग मदों—जैसे परीक्षा शुल्क, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क और खेलकूद शुल्क—के जरिए मनमाने तरीके से पैसे वसूल रहे हैं, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है।

📚 किताब-कॉपी से लेकर जूते तक में ‘जबरन वसूली’ का आरोप

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन न्यायालय और झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण के आदेशों की अवहेलना करते हुए—

स्कूल परिसर में ही किताबों की बिक्री कर रहे हैं

अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताब-कॉपी खरीदने को मजबूर कर रहे हैं

यहां तक कि जूते-मोजे और अन्य सामान भी निर्धारित दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है

महासंघ ने इसे झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम, 2017 का खुला उल्लंघन बताया।

⚠️ प्रशासन को चेतावनी — “3 दिन में समाधान, नहीं तो आंदोलन तेज”

महासंघ ने बताया कि इस मुद्दे पर कई बार जिला प्रशासन को साक्ष्यों के साथ ज्ञापन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी के विरोध में यह धरना आयोजित किया गया।

धरना के दौरान महासंघ ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द बैठक कर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

✊ श्वेता किन्नर भी उतरीं समर्थन में

धरना को उस समय और मजबूती मिली जब झारखंड ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य श्वेता किन्नर भी अभिभावकों के समर्थन में शामिल हुईं। उन्होंने पप्पू सिंह का 6 घंटे का उपवास जूस पिलाकर तुड़वाया और आंदोलन को समर्थन दिया।

👥 बड़ी संख्या में अभिभावकों की भागीदारी

धरना में महासंघ के महासचिव मनोज मिश्रा, वरीय उपाध्यक्ष मुकेश पाण्डेय, कोषाध्यक्ष प्रेम ठाकुर, मीडिया प्रभारी रतिलाल महतो समेत सैकड़ों अभिभावक मौजूद रहे और एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।

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