विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस बीच विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक संजीव कुमार शुक्रवार को विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गए। सत्तारूढ़ पार्टी के साथ अपने दो दशक पुराने संबंध को समाप्त करते हुए, संजीव कुमार खगड़िया जिले में आयोजित एक रैली में राजद में शामिल हुए।

तेजस्वी सदस्यता समारोह में नहीं हो सके शामिल
तेजस्वी यादव के हाथों जदयू विधायक डॉ संजीव कुमार को सदस्यता देनी थी, लेकिन मौसम खराब होने के कारण तेजस्वी यादव कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। जिसको लेकर अलौली विधायक रामवृक्ष सदा, खगड़िया विधायक छत्रपति यादव सहित राजद के कई वरिष्ठ नेता और जिलाध्यक्ष मनोहर यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दिलायी गयी।
राजद में जाने की लग रही थी अटकलें
डॉ. संजीव कुमार के राजद में जाने के कयास पहले से लगाए जा रहे थे। बीते दिनों जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार परबत्ता विधानसभा क्षेत्र के सतीश नगर गांव पूर्व मुख्यमंत्री स्मृति शेष सतीश प्रसाद सिंह की प्रतिमा के अनावरण को पहुंचे थे, तो वहां भी परबत्ता विधायक डॉ. संजीव कुमार की मौजूदगी नहीं दिखी थी।
लंबे समय से चल रहे थे पार्टी से नाराज
संजीव कुमार लंबे समय से पार्टी से नाराज थे। बार-बार पार्टी की नीतियों पर हमला भी करते रहे। मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर भी उन्होंने हमला बोला था। फ्लोर टेस्ट के दौरान भी संजीव कुमार की नाराजगी सामने आई थी। फ्लोर टेस्ट के दो दिन पहले तक वह गायब थे। उसी दिन पुलिस ने उन्हें डिटेन किया था उसके बाद वह आए थे। कहा गया था कि सीएम नीतीश कुमार के मानने के बाद वह पहुंचे थे।
जदयू प्रवक्ता का सीधा हमला
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने इस कदम को सीधा-सीधा पार्टी विरोधी गतिविधि बताया और उन पर नीतीश सरकार गिराने की साज़िश का मास्टरमाइंड होने का गंभीर आरोप लगाया। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि परबत्ता से विधायक संजीव कुमार लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। उनका दावा है कि संजीव कुमार पहले ही आरजेडी में जाने का मन बना चुके थे और सरकार को अस्थिर करने की हर कोशिश में शामिल रहे।

