पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी बिहार के महाधिवक्ता प्रशांत कुमार शाही उर्फ पीके शाही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के करीब दो माह बाद राज्य के शीर्ष विधि अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया है। इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
पीके शाही ने दिया इस्तीफा
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री काल में पीके शाही 2005 से 2010 तक भी बिहार के महाधिवक्ता रह चुके हैं। 2023 में पीके शाही बिहार के 22वें महाधिवक्ता के रूप में जिम्मेवारी संभाली थी। अब बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद पीके शाही ने इस्तीफा देने का बड़ा फैसला लिया है।
नीतीश के कार्यकाल में रह चुके हैं मंत्री
शाही को नीतीश कुमार ने अपने मुख्यमंत्री रहते हुए एमएलसी भी बनाया था और उन्हें राजनीति में ले आए थे। नीतीश कुमार ने उनको 2010 से 2015 तक बिहार शिक्षा मंत्री भी बनाया। वे पर्यावरण एवं वन और योजना विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इतना ही नहीं नीतीश कुमार ने उन्हें महाराजगंज लोकसभा सीट से 2013 में उप चुनाव भी लड़वाया था हालांकि वह राजद प्रत्याशी से हार गए थे।
नीतीश कुमार के करीबी हैं शाही
पीके शाही ने इस दौरान सरकार की तरफ से कई मुद्दों पर उपरी अदालतों में पक्ष रखा। लेकिन सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद अब उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है। पीके शाही सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि मशहूर वकील भी हैं। वो एक अर्से से नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में से एक हैं।
सरकार बदलते ही इस्तीफा
नीतीश कुमार के इस्तीफा देने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि पीके शाही की जगह सरकार किसी अन्य को महाधिवक्ता बनाना चाहती है। सरकार बदलने के बाद इसे सामान्य बदलाव के रूप में देखा जाता है लेकिन नीतीश कुमार के नजदीकी पीके शाही का अचानक इस्तीफा देने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चा भी है। ऐसे में अब देखना है कि सम्राट चौधरी महाधिवक्ता पद की जिम्मेदारी किसे देते हैं?

