बिहार में अस्पतालों में सीधे रेफर पर लगेगी रोक, 15 जुलाई से लागू होगी नई रेफरल प्रणाली

Neelam
By Neelam
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बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों को सीधे बड़े मेडिकल कॉलेजों में रेफर करने के खेल पर अब पूरी तरह रोक लगेगी। राज्य के सभी जिला अस्पतालों में आगामी 15 जुलाई से एक नई और प्रभावी रेफरल प्रणाली को लागू किया जा रहा है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने एक उच्च स्तरीय बैठक में ये फैसला लिया।

May I Help You’ डेस्क स्थापित करने का निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों और सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य के सभी अस्पतालों में मरीजों की सुविधा के लिए ‘May I Help You’ डेस्क स्थापित करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी प्रमंडलों के क्षेत्रीय अपर निदेशक, सभी जिलों के सिविल सर्जन और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।

अस्पतालों में सीधे रेफर करने पर रोक

बैठक में राज्य के सभी जिला अस्पतालों में आगामी 15 जुलाई से एक नई और प्रभावी रेफरल प्रणाली को लागू करने का फैसला लिया गया। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने साफ कहा कि डॉक्टर अब सामान्य मरीजों को सीधे बड़े मेडिकल कॉलेजों में रेफर नहीं कर सकेंगे।

जिला और स्थानीय स्तर मिलेगा पूरा इलाज

मरीजों को जिला और स्थानीय स्तर पर ही मुकम्मल इलाज देना होगा। केवल बेहद गंभीर या जटिल मामलों में ही मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजने की अनुमति होगी। इस कदम से पटना और अन्य बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का अतिरिक्त दबाव कम होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर मरीज तक समयबद्ध स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना प्राथमिकता है।

ओपीडी में आभा’ आधारित रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

इसके अलावा अस्पतालों में तकनीकी सुधार को बढ़ावा देने के लिए मरीजों का आभा (ABHA – Ayushman Bharat Health Account) आधारित ओपीडी रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया गया है।  इससे मरीजों का मेडिकल इतिहास पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन आधारित कतार प्रबंधन प्रणाली शुरू की जाएगी।

डॉक्टरों की 100 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य

अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की 100 फीसदी उपस्थिती के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। अब सभी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार अनिवार्य सेवाएं देने के साथ-साथ सभी स्वास्थ्यकर्मियों का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री तैयार किया जाएगा, जिसे सीधे भव्य पोर्टल से मैप किया जाएगा। व्यवस्थाओं की सतत निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तरीय टीमें अब अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगी।

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