बिहार में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य की शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक माह में आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की 62 प्रतिशत बहाली का ऐलान किया।
एक महीने के अंदर होगी शिक्षक बहाली
विधानसभा में चर्चा के दौरान बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने शिक्षा विभाग को विशेष मॉनिटरिंग करने का निर्देश देते हुए कहा कि “मैं शिक्षा विभाग को इसके लिए विशेष मॉनिटरिंग करने का निर्देश देता हूं। एक महीने के अंदर शिक्षक बहाली की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
6 महीने में स्कूलों को मिलेगी जमीन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और शिक्षकों की कमी उनकी पढ़ाई में बाधा न बने। इसलिए रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के हाई स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जिन हाई स्कूलों के पास अपनी जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां अगले छह महीने के भीतर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। जमीन उपलब्ध होने के बाद स्कूल भवनों का निर्माण कराया जाएगा ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें।
सत्ता पक्ष के विधायक ने उठाया शिक्षकों की कमी का मुद्दा
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य में शिक्षकों और उच्च शिक्षा विभाग में खाली पड़े पदों का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर रिक्तियों का सवाल उठाया। जदयू विधायक श्याम रजक ने सदन में कहा कि राज्य के डॉ. बीआर आंबेडकर विद्यालयों में करीब 62 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकांश पद रिक्त हैं तो इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव होगी। उन्होंने सरकार से रिक्त पदों को भरने की समय-सीमा तय करने की मांग भी की।

