टीएमसी के बागी सांसद क्षेत्रीय पार्टी NCPI में शामिल होंगे, NDA को समर्थन देने का ऐलान

Neelam
By Neelam
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता दीदी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसदों में से 20 बागी सांसदों के गुट ने अपना रास्ता अलग कर लिया है। तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी रविवार को तृणमूल कांग्रेस का संकट उस वक्त और गहरा गया जब बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक बेहद छोटी राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा की।

स्पीकर ओम बिरला को सौंपा पत्र

पश्चिम बंगाल की सियासत में जारी उथल-पुथल के बीच ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर अपना गुट बनाने और अपने इस नए समूह का विलय NCPI के साथ करने का ऐलान कर दिया है। बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपने के बाद इसका ऐलान किया।

ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं की बगावत

बिरला से मुलाकात की जो फोटो सामने आई है, उसमें 17 TMC सांसद दिख रहे हैं। सामने आई तस्वीर में ओम बिरला के लेफ्ट में शताब्दी रॉय और राइट में सुदीप बंदोपाध्याय नजर आ रहे हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि दोनों नेता ममता बनर्जी के बेहद करीब माने जाते रहे हैं। आज बगावती गुट की तस्वीर खिंचवाने में सबसे आगे दिखे। सुदीप का बागी होना बेहद अहम घटना है। दरअसल, सुदीप टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं। वह टीएमसी के सबसे पुराने नेता हैं।

एनसीपीआई अब एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) त्रिपुरा की रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है। विलय के बाद एनसीपीआई पार्टी अब एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है, क्योंकि बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा 20 सांसद इनके पास होंगे। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार सीटों- चावमानू, अंबासा, करमछड़ा और कैलाशहर पर चुनाव लड़ी थी। उसका प्रदर्शन काफी कमजोर रहा था। हालांकि, इस घटनाक्रम ने बंगाल की एक कम जानी-पहचानी पार्टी को तृणमूल के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट में एक अहम खिलाड़ी बना दिया है

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