डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह हफ्ता बेहद निराशाजनक रहा है। 1 अक्टूबर 2026 को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भी बाजार लाल निशान के साथ बंद हुआ, जिसके साथ ही बाजार में लगातार गिरावट का यह 8वां हफ्ता पूरा हो गया है। पिछले 25 वर्षों में यह शेयर बाजार का सबसे लंबा मंदी का दौर है, क्योंकि इससे पहले साल 2001 में बाजार लगातार 9 हफ्तों तक गिरा था।
आज बाजार का हाल
सेंसेक्स: आज सेंसेक्स 570 अंक (या 0.79%) की भारी गिरावट के साथ 71,910 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी: निफ्टी में भी 198 अंक (या 0.88%) की कमजोरी दर्ज की गई, जिससे यह फिसलकर 22,422 पर आ गया।
सेक्टरवार प्रदर्शन: ऑटो और मीडिया शेयरों में आज सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली।
जनवरी में अपने 26,373 के ऑल-टाइम हाई स्तर से निफ्टी अब तक लगभग 15% नीचे आ चुका है। नियमों के अनुसार अगर बाजार अपने ऊपरी स्तर से 20% तक गिर जाता है, तो उसे आधिकारिक तौर पर ‘बियर मार्केट’ (मंदी का दौर) मान लिया जाता है।
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट की मुख्य वजहें
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से तेजी से पैसा निकाला है। अकेले मंगलवार और बुधवार को 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेचे गए, जिससे इस हफ्ते बुधवार तक कुल बिकवाली लगभग 26 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई। पिछले 7 दिनों में FII ने कुल 29,176 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: 10 साल के अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज (यील्ड) बढ़कर 5.33% और 30 साल के बॉन्ड पर 5.67% पहुंच गया है, जो 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर अधिक रिटर्न मिलने के कारण विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं।
रुपये में कमजोरी: डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा है और प्रति डॉलर रुपया गिरकर 95.98 के स्तर पर आ गया है। हालांकि सरकारी बैंकों ने डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की, लेकिन करेंसी के कमजोर होने का सीधा नकारात्मक असर शेयर बाजार पर पड़ा है।
इसके अलावा अन्य बाजार अपडेट
मर्नीव्यू आईपीओ की शानदार लिस्टिंग: डिजिटल लैंडिंग प्लेटफॉर्म मनीव्यू का शेयर ₹34 के इश्यू प्राइस के मुकाबले 61.76% की जोरदार छलांग लगाकर ₹55 पर लिस्ट हुआ। इसका आईपीओ 98.46 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का रुख: आज एशियाई बाजारों (कोस्पी, निक्केई और हैंगसेंग) में तेजी देखने को मिली, जबकि 30 सितंबर को अमेरिकी बाजार (डाऊ जोन्स और S&P 500) गिरावट के साथ बंद हुए थे।

