बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू यादव के लिए कल यानी 5 जनवरी का दिन काफी अहम है। पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने आइआरसीटीसी घोटाला मामले में उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका पर सोमवार को न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ सुनवाई करेगी।

लालू समेत पूरा यादव परिवार आरोपी
13 अक्टूबर 2025 में, निचली अदालत ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम द्वारा निविदा आवंटन में कथित अनियमितताओं के संबंध में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। उनकी पत्नी, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, और उनके बेटे तेजस्वी यादव, जो वर्तमान में बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं, पर भी आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी सहित कई अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
रेल मंत्री रहते लालू पर पद के दुरुपयोग का आरोप
आरोप तय करते समय, राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विशाल गोगने ने पाया कि लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, भूमि निविदा प्रक्रिया में पात्रता शर्तों में हेरफेर करने के लिए कथित तौर पर अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया था। यह कथित घोटाला 2004 और 2009 के बीच हुआ था जब लालू प्रसाद केंद्रीय रेल मंत्री थे।
2017 में दर्ज हुआ था मामला
ये मामला 5 जुलाई 2017 को दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड (एसएचपीएल) के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित बीएनआर (बंगाल रेलवे नागपुर) होटलों की लीजिंग में अनियमितताएं कीं।
राबड़ी देवी को भी कोर्ट से झटका
लालू यादव से पहले पिछले महीने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा दायर कई ट्रांसफर याचिकाएं दिल्ली की अदालत ने खारिज कर दी थीं। ये याचिकाएं: IRCTC होटल घोटाला मामला, सीबीआई का नौकरी के बदले जमीन मामला, ईडी के दो मनी लॉन्ड्रिंग मामलों से जुड़ी थीं।

