लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सजा निलंबन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई टली

Neelam
By Neelam
4 Min Read

पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देवघर जिला कोषागार घोटाले मामले में मिली सजा के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। पीठ ने ये कहते हुए मामले को टाल दिया कि दलीलें पूरी नहीं हुई हैं और कुछ की मौत हो चुकी है। अब इस मामले में सुनवाई अप्रैल में होगी। 

लालू यादव की जमानत पर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देवघर ट्रेजरी से जुड़े चारा घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई हुई। सजा के निलंबन को चुनौती देने के मामले में मंगलवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच में सुनवाई हुई।

लालू की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल

सप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, सीबीआई ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने एक गैर-कानूनी आदेश पारित किया है और कानून का उल्लंघन करते हुए सजा निलंबित की गई है। वहीं, लालू की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कुछ आरोपियों को नोटिस नहीं दिया गया है।

कोर्ट ने क्या कहा?

इस पर अदालत ने कहा, ‘हम दोनों ही जानते हैं कि ये कैसी विशेष अनुमति याचिका है। हमें लगता है कि आप दोनों जानते हैं कि इसका नतीजा क्या होगा। हम सभी जानते हैं कि कानून का सवाल क्या है। लोग 60, 70 और 80 की उम्र के हैं।’ पीठ ने कहा, ‘फाइलें बस लटकी हुई हैं। हम अप्रैल में तारीख देंगे। जिन मामलों में प्रतिवादियों की मौत हो गई है, हम उन्हें बंद कर देंगे।’

झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती

बता दें कि सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत लालू प्रसाद यादव को जमानत दी गई थी। झारखंड उच्च न्यायालय ने पिछले साल जुलाई में लालू यादव को सुनाई गई सजा की अवधि बढ़ाने के लिए सीबीआई की अपील विचारार्थ स्वीकार कर ली थी।

89 लाख रुपए के गबन का आरोप

लालू यादव को देवघर कोषागार से जुड़े घोटाले में दोषी ठहराया गया था, जिसमें 89 लाख रुपए के गबन का आरोप था। विशेष सीबीआई अदालत ने लालू यादव को इस मामले में दोषी ठहराया था और उन्हें साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। सीबीआई ने आदेश के खिलाफ अपील करते हुए कहा कि लालू यादव उस समय पशुधन विभाग का कामकाज देख रहे थे। उसने कहा कि जांच में पता चला था कि उन्हें देवघर कोषागार में हुए गबन के बारे में पता था, फिर भी निचली अदालत ने इस जुर्म के लिए सिर्फ साढ़े तीन साल की सजा सुनाई, जिसमें अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है। घोटाला सामने आने के समय झारखंड अविभाजित बिहार का हिस्सा था।

Share This Article