जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्रों में स्थावर संपत्ति के अंतरण प्रतिषेध विधेयक पर चर्चा के दौरान सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने तीखे तेवर के साथ भट्टा बस्ती और शास्त्री नगर क्षेत्रों के मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय इन इलाकों में अराजक माहौल के कारण कई परिवारों को पलायन तक करना पड़ा, जो बेहद चिंताजनक स्थिति थी।
विधेयक को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शर्मा ने संशोधन का सुझाव देते हुए कहा कि संपत्ति अंतरण से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार कलेक्टर के पास होना चाहिए। उनके अनुसार इससे निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात में इस तरह का कानून लंबे समय से लागू है और वहां पिछले 25 वर्षों से बड़े दंगे नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमें दंगा नहीं, गंगा चाहिए।”
विधायक ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि अराजकता और दबाव बनाकर की जाने वाली संपत्ति खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि कानून में किसी समुदाय का नाम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विक्षुब्ध क्षेत्रों में संपत्ति का लेन-देन पूरी तरह स्वेच्छा और बिना किसी दबाव के हो।
मुआवजे में भेदभाव का लगाया आरोप
विधानसभा में बोलते हुए गोपाल शर्मा ने उदयपुर के कन्हैयालाल साहू हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि इस वीभत्स घटना ने मानवता को शर्मसार किया, लेकिन पीड़ित परिवार को मुआवजा देने में देरी हुई। वहीं जयपुर के गंगापोल क्षेत्र में आपसी विवाद में एक युवक की मौत के मामले में तुरंत मुआवजा दिए जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने पूर्व सरकार के रवैये पर सवाल उठाए और इसे सांप्रदायिक दृष्टिकोण बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत करने और संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी है।

