डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: अगर आप भी रसोई गैस सिलेंडर बुक करने के बाद कंफर्मेशन मैसेज का घंटों इंतजार करते हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है। तेल कंपनियों ने गैस बुकिंग की तकनीकी प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब उपभोक्ताओं को बुकिंग स्वीकार होने या रिजेक्ट होने की सटीक जानकारी 24 घंटे के भीतर मिल जाएगी।
क्यों पड़ी सिस्टम बदलने की जरूरत?
हाल के दिनों में गैस की मांग और बुकिंग कॉल्स की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, 26 फरवरी तक राष्ट्रीय स्तर पर पूछताछ और बुकिंग के लिए रोजाना औसतन 37 लाख कॉल्स आ रही थीं, जो अब बढ़कर लगभग 3 करोड़ पहुंच गई हैं। इस भारी दबाव के कारण सर्वर लोड बढ़ गया था और ग्राहकों को बुकिंग का स्टेटस पता नहीं चल पा रहा था।
क्या है नया ‘डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोसेसिंग’ सिस्टम?
सर्वर को क्रैश होने से बचाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब ‘डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोसेसिंग प्रणाली’ लागू की गई है।
लोड मैनेजमेंट: पहले सभी बुकिंग रिक्वेस्ट एक साथ मुख्य सर्वर पर जाती थीं। अब इन्हें छोटे बैच में प्रोसेस किया जाएगा।
त्वरित जांच: सिस्टम बुकिंग लेते समय ही कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच करेगा, जैसे उपभोक्ता का मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड है या नहीं? पिछली डिलीवरी 25 या 45 दिनों के भीतर हुई है या नहीं? क्या उपभोक्ता साल में तय सीमा (15 से अधिक रीफिल) से ज्यादा बुकिंग तो नहीं कर रहा?
SMS अलर्ट: जांच पूरी होते ही उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS भेज दिया जाएगा। अगर बुकिंग किसी कारणवश रिजेक्ट होती है, तो उसका कारण भी स्पष्ट किया जाएगा।
उपभोक्ताओं को कैसे होगा फायदा?
सुविधा/ पुराने सिस्टम में/ नए सिस्टम में (अब)
बुकिंग स्टेटस/ घंटों या दिनों तक अनिश्चितता/ अधिकतम 24 घंटे में स्पष्ट जानकारी
सर्वर की स्थिति/ लोड अधिक होने पर सिस्टम हैंग/ सुचारू और तेज प्रोसेसिंग
पारदर्शिता /रिजेक्शन का कारण पता नहीं चलता था/ कारण सहित SMS प्राप्त होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीकी बदलाव से न केवल ग्राहकों की परेशानी कम होगी, बल्कि गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी सुव्यवस्थित तरीके से काम करने में मदद मिलेगी। मिस्ड कॉल से बुकिंग करने वाले ग्राहकों को भी इस नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा।

