झारखंड पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। धनबाद जिले में पदस्थापित एक थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) पर हुई कार्रवाई ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार झारखंड–पश्चिम बंगाल सीमा पर स्थित देबूडीह चेक पोस्ट पर विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सघन वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान शनिवार रात एक इंस्पेक्टर की गाड़ी को जांच के लिए रोका गया।
जांच के दौरान चौंकाने वाली स्थिति सामने आई—अधिकारी की गाड़ी से करीब ₹2.5 लाख नकद बरामद हुआ। चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों ने तत्काल राशि को जब्त कर लिया।
इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस और चुनाव अधिकारियों ने इंस्पेक्टर से लगभग पांच घंटे तक पूछताछ की। उनसे पैसे के स्रोत, गंतव्य और उपयोग को लेकर सवाल किए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।
सूत्रों के मुताबिक, यदि मामला केवल पुलिस स्तर तक सीमित रहता तो संभवतः दब सकता था, लेकिन चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों ने नियमों का सख्ती से पालन करते हुए कार्रवाई की।
इस घटना के बाद संबंधित अधिकारी पर विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी है। हालांकि अब सवाल ये भी उठने लगे हैं कि यह मामला शनिवार रात की है ऐसे में इससे जुड़े साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए लेकिन साक्ष्य की उपलब्धता और प्रमाणिकता भी संदेह के घेरे में हो सकता है ऐसा कहा जाना अतिश्योक्ति नहीं होंगी।
बताया जा रहा है कि उक्त इंस्पेक्टर को हाल ही में तोपचाची से निरसा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से तबादला किया गया था।
गौरतलब है कि हाल ही में राजगंज थाना प्रभारी का वर्दी में डांस करते हुए वीडियो वायरल हुआ था, जिस पर एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन क्लोज कर दिया था। ऐसे में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पुलिस महकमे की छवि को प्रभावित किया है।
अब देखना होगा कि इस मामले में क्या सख्त कार्रवाई होती है और उठ रहे सवालों का जवाब किस तरह दिया जाता है।

