CBI के हत्थे चढ़े गैंगस्टर भोला सिंह, अलग-अलग थानों में दर्ज है 11 केस, 12 साल से थी तलाश

Neelam
By Neelam
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बिहार का कुख्यात अपराधी भोला सिंह आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 12 साल से फरार चल रहे इस कुख्यात को गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया है। वह वहां अपनी पहचान छिपा कर रह रहा था, लोग उसे वहां अमित और गौतम के नाम से जानते थे।

अलग-अलग थानों में 11 केस दर्ज

भोला सिंह को बिहार अलग-अलग थानों की पुलिस भी ढूंढ रही थी। उस पर इन थानों में 11 केस दर्ज हैं। भोला सिंह किडनैपिंग, मर्डर समेत कई बडे़ अपराधों का आरोपी है। इतना ही नहीं वहीं से बैठकर भोला पटना में अपना गैंग भी ऑपरेट कर रहा था। भोला सिंह को पकड़ने के लिए 3.5 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

11 साल से फरार भोला को CBI ने दबोचा

भोला सिंह दो लोगों के अपहरण से जुड़े मामले  में 12 साल से फरार था। 2015 में सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की थी और तभी से भोला सिंह अंडरग्राउंड हो गया था। भोला सिंह ने सूरत में अमित शर्मा के नाम से फर्जी आईडी बनवा ली थी और सूरत जाकर भूमिगत हो गया था। सीबीआई ने इसी बीच टेक्निकल सर्विलांस के साथ मुखबिरों का जाल बिछाया तो उसके ठिकाने का पता चल गया। इसके बाद ट्रैप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई के गिरफ्तार किए जाने के बाद भोला सिंह को कोलकाता पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है।

CRPF कमांडो कैसे आया अपराध की दुनिया में

पटना के पंडारक का रहने वाला भोला सिंह अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में एक जवान था। उसने बाकायदा कमांडो की ट्रेनिंग ली थी, यही वजह थी कि वह पुलिस और जांच एजेंसियों को 12 सालों तक चकमा देने में सफल रहा। फोर्स में नौकरी छोड़ने के बाद, वह मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह के संपर्क में आया। भोला सिंह जल्द ही अनंत सिंह का सबसे करीबी विश्वासपात्र बन गया।

कभी बाहुबली अनंत सिंह की परछाईं बनकर रहा

वह अनंत सिंह की परछाईं बनकर रहने लगा और बाढ़ एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) में ठेकेदारी के साम्राज्य को संभालने लगा। हालांकि, 2 करोड़ रुपये के एक वित्तीय लेन-देन को लेकर हुए विवाद के बाद उनकी दोस्ती में दरार आ गई। साल 2010 में,इसी वित्तीय विवाद ने उनके बीच एक ऐसी खाई पैदा कर दी जिसे पाटना नामुमकिन था। दोनों के बीच दुश्मनी इतनी बढ़ गई कि साल 2013 में अनंत सिंह के एक करीबी सहयोगी राजीव सिंह की हत्या कर दी गई, इस अपराध का आरोप भी भोला सिंह पर ही लगा। इस घटना के बाद, दोनों विरोधी सीधे टकराव की स्थिति में आ गए।

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