अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अभी तक खत्म नहीं हो पाया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे की तारीख तय हो गई है। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन में रहेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बीजिंग में होगी।
शी जिनपिंग के निमंत्रण चीन आ रहे ट्रंप
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने मूल रूप से 2026 की पहली तिमाही में चीन का दौरा करने की योजना बनाई थी। लेकिन ईरान वॉर के बाद से इसको लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 11 मई को घोषणा की कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा करेंगे।
दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच यात्रा
लगभग नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा होगी। वहीं, ट्रंप की दूसरी चीन यात्रा होगी। इससे पहले ट्रंप 2017 में चीन गए थे। यह यात्रा अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच चल रहे लंबे युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट और ताइवान सहित कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हो रही है।
इस अहम मुद्दे पर होगी बातचीत
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप इस बैठक में चीन पर ईरान और रूस को मिल रही मदद रोकने का दबाव बनाएंगे। अमेरिका का आरोप है कि चीन ऐसे सामान और तकनीक दे रहा है, जिनका इस्तेमाल सैन्य कामों में भी हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप पहले भी शी जिनपिंग के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर चुके हैं और इस बार की मुलाकात में भी यह अहम मुद्दा होगा।
इन मुद्दों पर भी होगा खास ध्यान
इसके अलावा मुख्य रूप से व्यापार, निवेश और टैरिफ जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही टेक्नोलॉजी सहयोग और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर भी महत्वपूर्ण संवाद हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों महाशक्तियों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक तनाव काफी बढ़ा है। ऐसे में इस बैठक को रिश्तों की बर्फ पिघलाने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
क्या ईरान-यूएस शांति समझौते में चीन की होगी अहम भूमिका?
ट्रंप के दौरे से पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची 6 मई को बीजिंग पहुंचे थे। यहां उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या चीन शांति समझौते में भूमिका निभा सकता है। विदेश मंत्री वांग ने अराघची के साथ अपनी बैठक में शांति वार्ता में मदद करने और मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने में बड़ी भूमिका निभाने का वादा किया था।

