West Bengal में पहली बार बनी बीजेपी सरकार ने सत्ता संभालते ही कई बड़े और सख्त फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारीके नेतृत्व वाली सरकार के फैसलों को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एक तरफ सरकार इन्हें “राष्ट्रहित और प्रशासनिक सुधार” बता रही है, वहीं विपक्ष और कई संगठनों ने कुछ फैसलों को विवादित करार दिया है।
सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में प्रार्थना के समय ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक अब हर मदरसे में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा। इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए भी नया दिशा-निर्देश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति मीडिया से बात नहीं कर सकेगा। टीवी चैनलों या अखबारों को इंटरव्यू देने और बिना अनुमति लेख लिखने पर भी रोक लगाई गई है। इतना ही नहीं, केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए 1975 के आपातकाल से तुलना की है। शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि इससे कर्मचारियों की आवाज दबाने की कोशिश होगी और सेंसरशिप बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर भी कई बड़े बदलाव किए हैं। अधिकारियों के तबादले, कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश और पूर्ववर्ती सरकार के समय हुई कथित अनियमितताओं की जांच जैसे फैसलों पर तेजी से काम शुरू हुआ है।
सरकार ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ को भी मंजूरी दे दी है। यह योजना 1 जून से लागू होगी, जिसके तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये देने का प्रावधान किया गया है। इसे महिलाओं के लिए बड़ी राहत और बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना माना जा रहा है।
वहीं OBC आरक्षण को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। अब राज्य में केवल 66 जातियां और समुदाय ही OBC आरक्षण के दायरे में रहेंगे। इस फैसले के बाद सामाजिक और राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
इसके अलावा सरकार ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, में 120 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य सीमा सुरक्षा मजबूत करना, बाड़बंदी और बुनियादी ढांचे का विकास करना है। यह कॉरिडोर उत्तर-पूर्व भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है।

