बंगाल में ‘शुभेंदु राज’ का एक और बड़ा फैसला: अब बकरीद पर दो नहीं, सिर्फ एक दिन मिलेगी छुट्टी

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार लगातार कड़े फैसले ले रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने अब त्योहारों की छुट्टियों में कटौती का एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। बंगाल सरकार द्वारा शनिवार को जारी नए आदेश के मुताबिक अब राज्य में बकरीद (ईद-उल-अजहा) पर दो दिन के बजाय सिर्फ एक दिन का सरकारी अवकाश रहेगा।

मुख्य बिंदु
नया आदेश: राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार 28 मई को बकरीद के मौके पर सरकारी छुट्टी रहेगी।
बदलाव: अगले दिन यानी 29 मई को सभी सरकारी दफ्तर, स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थान सामान्य रूप से खुले रहेंगे।
ममता सरकार का नियम बदला: पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में बकरीद पर दो दिनों के सरकारी अवकाश की व्यवस्था थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।
देशभर में तारीख: इस साल पूरे देश में 28 मई को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा।

प्रशासनिक सुधार या तुष्टिकरण पर प्रहार?
​शुभेंदु सरकार के इस फैसले को राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने और अतिरिक्त छुट्टियों में कटौती के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि सरकार पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के उन फैसलों को पलट रही है, जिन पर तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं। सरकार का तर्क है कि कार्यदिवसों को बढ़ाने और प्रशासनिक दक्षता के लिए यह कदम जरूरी था।

लगातार कड़े फैसले ले रही है नई सरकार
​बंगाल में सरकार बदलने के बाद से यह पहला मौका नहीं है जब मुस्लिम त्योहारों से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। इससे पहले भी शुभेंदु सरकार कुछ बड़े और कड़े कदम उठा चुकी है, जिन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी थी।

पहले भी आ चुके हैं ये आदेश
खुले में नमाज पर रोक: सरकार ने हाल ही में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाया था।
सार्वजनिक कुर्बानी पर पाबंदी: सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं की कुर्बानी देने पर भी रोक लगा दी गई है।
​सरकार के इन फैसलों को लेकर राज्य के विभिन्न मुस्लिम संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विपक्ष इसे एकतरफा कार्रवाई बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का मानना है कि कानून-व्यवस्था और आम जनता की सहूलियत के लिए ये नियम बेहद जरूरी हैं।

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